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Wednesday, March 25, 2026
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    डिजिटल माइनिंग मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने वाला पहला राज्य बना पंजाब

    Mansa News
    Mansa News: सरकारी आईटीआई के शिलान्यास अवसर पर सीएम मान ने जताया विश्वास

    भगवंत सिंह मान सरकार की बड़ी उपलब्धि, खत्म होगा गैरकानूनी माइनिंग का काम

    चंडीगढ़। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने पंजाब में डिजिटल माइनिंग मैनेजमेंट सिस्टम लागू कर दिया है। इस डिजिटल माइनिंग मैनेजमेंट सिस्टम को लागू करने वाला पंजाब भारत का पहला राज्य बन गया है। रोपड़ में स्थापित होने वाले इस केंद्र से खनिज स्रोतों के वैज्ञानिक और पारदर्शी मूल्यांकन को यकीनी बनाकर सरकारी राजस्व को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की ओर से पिछले लंबे समय से पंजाब में गैरकानूनी माइनिंग को रोकने के लिए अपने अधिकारियों को आदेश दिए जा रहे थे और बड़े पैमाने पर गैरकानूनी माइनिंग को रोका जा चुका है पर कई बार उच्च अधिकारियों की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर गैरकानूनी काम करने वाले लोगों ने गैरकानूनी माइनिंग के काम को शुरू कर दिया जाता रहा है लेकिन अब से बाद ऐसा नहीं होगा, क्योंकि यह तकनीकी विधियां, गैरकानूनी माइनिंग गतिविधियों को रोकने और मालिया नुकसान को रोकने में मदद करेंगी और पंजाब के माइनिंग सेक्टर को अधिक ढांचागत और टिकाऊ बनाने में योगदान देंगी।

    यह नई तकनीक निगरानी के अलावा यह केंद्र जिला सर्वेक्षण रिर्पोटें और माइन योजनाएं तैयार करने में अपनी महारत का विस्तार करेगा, जिससे विभाग को माइनिंग कार्यों को सुचारू बनाने में सहायता मिलेगी। गैरकानूनी माइनिंग को रोकने के लिए सैटेलाइट सर्वे, ड्रोन सर्वे और ग्राउंड सर्वे किए जाएंगे। यह सिस्टम आनलाइन काम करेगा, हर रोज डेटा अपडेट किया जाएगा और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी निश्चित की जाएगी। इस नई तकनीक से जो डेटा मिलेगा उसके साथ माइनिंग वाले स्थानों से पता लग सकेगा कि कितना रेत कानूनी और गैरकानूनी विधि से उठाया गया है।

    इस सिस्टम से डैमों में जमा हुए रेत का भी पता लगाया जा सकेगा कि बरसात से पहले कितने फीट रेत था और बाद में कितने फीट जमा है। इस सिस्टम से यह भी जानकारी मिलेगी कि कितनी खड्डों में काम चल रहा है और कितनी खड्डों में गैरकानूनी माइनिंग की जा रही है।

    इस केंद्र से दिया गया डेटा मानसून से पहले दरियाओं में रेत का सही प्रबंध करने में सहायता करेगा और इस विधि से 20-20 मीटर की दूरी पर पानी के नीचे रेत और बजरी का पता लगाया जा सकेगा ताकि गांवों को बाढ़ से बचाया जा सके।