किसानों के लिए राहत की खबर, एक बारी चार में दो समूह चलाने पर सहमति

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Hanumangarh News: किसानों के लिए राहत की खबर, एक बारी चार में दो समूह चलाने पर सहमति

दो बारी तीन में एक समूह चलाने का निर्णय, जल परामर्शदात्री समिति की बैठक में हुआ हंगामा

हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज़)। Indira Gandhi Canal: चार में दो समूह चलाने की मांग कर रहे इंदिरा गांधी नहर के किसानों के लिए राहत की खबर है। इंदिरा गांधी नहर में एक बारी चार में दो समूह चलाए जाएंगे। उसके बाद तीन में एक समूह में पानी चलाया जाएगा। यह सहमति इंदिरा गांधी नहर में रेग्यूलेशन निर्धारित करने के लिए जल संसाधन विभाग मुख्य अभियंता कार्यालय में शनिवार को दोबारा बुलाई गई जल परामर्शदात्री समिति की बैठक में हुई। बैठक में मौजूद विपक्ष के विधायकों ने आईजीएनपी में चार में दो समूह में पानी चलाने की मांग को पुरजोर तरीके से रखा। Hanumangarh News

उनका कहना था कि जनवरी में गेहूं और सरसों दोनों फसलों को पानी की आवश्यकता है। किसान खर्चा करके बैठा है। अगर जनवरी में पानी नहीं दिया तो आगे चलकर पानी देने का फायदा नहीं। इस पर मुख्य अभियंता प्रदीप रुस्तगी ने बांध में कम पानी का हवाला देते हुए कहा कि तीन में एक समूह में पानी चलाया जा सकता है लेकिन विधायक चार में दो समूह में पानी देने की मांग पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि पानी नहीं मिला तो किसान बर्बाद हो जाएंगे। चार में दो समूह चलाने की जद्दोजहद को लेकर बैठक में खूब हंगामा हुआ। विधायकों व किसान प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान जा रहे पानी के मुद्दे को लेकर भी सरकार व विभाग को घेरा। Hanumangarh News

सभी बातों पर चर्चा के बाद पानी की व्यवस्था व उपलब्धता के आधार पर किसानों के हित में निर्णय हुआ और 4 जनवरी से 21 जनवरी तक एक बारी चार में दो समूह जबकि 13 मार्च तक दो बारी तीन में एक समूह चलाया जाएगा। उसके बाद उपलब्धता के आधार पर नहरों में पानी प्रवाहित किया जाएगा। बैठक में रायसिंहनगर विधायक सोहन नायक, अनूपगढ़ विधायक शिमला नायक, सूरतगढ़ विधायक डूंगरराम गेदर, पीलीबंगा विधायक विनोद गोठवाल, संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनिया, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मनीष मक्कासर ने किसानों का प्रतिनिधित्व किया। प्रशासन की तरफ से एसडीएम मांगीलाल सुथार बैठक में मौजूद रहे।

इससे पहले 30 दिसम्बर को हुई जल परामर्शदात्री समिति की बैठक में कोई निर्णय नहीं हो पाया था। बैठक में अनूपगढ़ विधायक शिमला नायक ने मुद्दा रखा कि 21 सितम्बर से 20 मई तक तय होने वाले राजस्थान के शेयर में चार अक्टूबर से लेकर 9 अक्टूबर तक लगभग 3 लाख 73 हजार के आसपास पानी निकाल लिया गया जो किसानों के खेतों में जाना चाहिए था। वह पानी किसानों को नहीं मिला। वह पानी भी किसानों को दिया जाए। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि इस समस्या को लेकर आईजीएनपी के पूरे चरण पर बसे किसानों की गेहूं और सरसों की फसल को बचाने के लिए वह पानी दिया जाए, चाहे उसके लिए पंजाब से बात क्यों न करनी पड़ी।

अनूपगढ़ विधायक बोलीं-किसानों की जीत, दबाव की वजह से मिला पानी

अनूपगढ़ विधायक शिमला नायक ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि हम एक बूंद पानी पाकिस्तान नहीं जाने देंगे। हम खून और पानी एकसाथ नहीं बहने देंगे। अगर यह डबल इंजन की सरकार है तो क्यों किसानों को बर्बाद करने पर तुली हुई है। वह पाकिस्तान जा रहे पानी को रोके। मंच पर खड़े होकर बड़े-बड़े वादे करने से कुछ नहीं होने वाला।

उन्होंने सरकार से मांग की कि भविष्य में ऐसी स्थिति कभी पैदा न हो कि किसान की पकी-पकाई फसल पानी के अभाव में खराब हो जाए। भविष्य में भी पानी की उचित व्यवस्था करते हुए किसान और किसानी को बचाया जाए। उन्होंने चार में दो समूह चलाए जाने पर सहमति बनने को किसानों की जीत बताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों व किसानों के दबाव की वजह से मांग अनुसार पानी मिल सका है। Hanumangarh News

पानी नहीं मिला तो विधानसभा में घेरेंगे सरकार: सोहन नायक

संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनिया ने कहा कि जहां किसान की बात है उन मीटिंगों में सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं आता। क्या दोनों जिलों में सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं है। उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं सरकार को सोचना पड़ेगा कि आईजीएनपी किसान की रीढ़ की हड्डी है। अगर आईजीएनपी के रेग्यूलेशन को कमजोर किया जाएगा तो किसान कमजोर होगा। चाहे कोई भी सरकार हो, उसे इस समस्या के समाधान के लिए मजबूत कदम उठाने होंगे। पूनिया ने कहा कि पानी पाकिस्तान जा रहा है।

किसान के लिए इससे ज्यादा पीड़ा क्या हो सकती है लेकिन डबल इंजन की सरकार चुप है। सरकार ईआरसीपी लाकर वाहवाही लूटने का काम कर रही है। सरकार को किसान की फसल के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करनी चाहिए। विधायक सोहनलाल नायक ने कहा कि चार में दो समूह में पानी चलाने के बाद अगर 13 मार्च के बाद मांग अनुसार पानी नहीं दिया गया तो विधानसभा में सरकार को इस मुद्दे पर घेरा जाएगा कि किसानों की फसलें बचाई जाएं। जरूरत पड़ी तो विधानसभा धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। किसानों की फसलें बर्बाद नहीं होने देंगे।

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