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Wednesday, March 25, 2026
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    पूज्य गुरु जी ने बताया होली पर क्या करना है, पढ़े ये वचन

    बरनावा। सच्चे, रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा (यूपी) से अपने पावन वचनों की वर्षा की। पूज्य गुरु जी ने फरमाया आमतौर पर ये सुना हमने जब होली आती है तो बड़ा शोर मचता है कि भई पानी की बर्बादी ना करो। पर कभी ध्यान दिया है कि शराब बनाने में कितना पानी प्रयोग हो रहा है? चमड़ा, जिससे जूते, बैग वगैरह बनाते हो, उसको धोने में, उसको साफ करने में कितना पानी बर्बाद हो रहा है? और भी कई फैक्टरियों में पानी बर्बाद होता है।

    तो कभी उस तरफ किसी का ध्यान गया? जाना चाहिए, सिर्फ एक हमारा त्यौहार है होली, हम नहीं कहते कि उसमें पानी बर्बाद करो, पर अगर थोड़ा सा पानी उसमें आप प्रयोग में लाएं तो त्यौहार भी मन जाए और पानी की बर्बादी भी ना हो। पर शोर उसी दिन क्यों मचता है? आम दिनों में क्यों नहंी बात उठती? कि भई शराब से इतना पानी बर्बाद हो रहा है, चमड़ा धोने में इतना पानी बर्बाद हो रहा है, फैक्टरियों में इतना पानी बर्बाद हो रहा है। कोई उठता है इस बारे में सोचता है। हर इन्सान को सोचना चाहिए, तभी तो समाज और देश का भला होगा।

    अगर हर इन्सान समाज में से उठेगा, जागेगा तभी देश का भला होना है और तभी देश के जो राजा हैं वो आपका साथ दे पाएंगे। वो कितना भी कुछ करते फिरें, अगर आप साथ नहीं देते तो कैसे, पानी की बर्बादी हो गई, जनसंख्या का विस्फोट हो गया, या यूं कह लीजिये बिजली की बर्बादी हो गई, ये तो आपके हाथ में है ना जी, कमरे से निकलते हैं बल्ब जल रहे हैं, एसी चलता छोड़ गए, कि आऊंगा तो कमरा बिल्कुल ठंडा मिलना चाहिए। पंखा चलता छोड़ गए, आपको लगता है कि छोटी सी चीज है, जी नहीं, ये बहुत बड़ी बर्बादी कर रहे हैं आप। क्या हर्ज कि अगर आप बंद करके जाएं कमरे की सारी लाइटें। जब आपने 12 घंटे, 8 घंटे बाहर रहना। आफ दफ्तर जा रहे हैं, आप खेत में जा रहे हैं, कॉलेज में जा रहे हैं, कहीं भी जा रहे हैं तो उस समय आपके घर में कोई नहीं है, आपके कमरे में कोई नहीं है, कम से कम उसकी लाइटें, पंखे, एसी जो भी आप चलाते हैं, वो तो बंद होने चाहिए। कौन इस तरफ ध्यान देता है। कौन माथापच्ची करे।

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    आमतौर पर ये सुना हमने जब होली आती है तो बड़ा शोर मचता है कि भई पानी की बर्बादी ना करो। पर कभी ध्यान दिया है कि शराब बनाने में कितना पानी प्रयोग हो रहा है? चमड़ा, जिससे जूते, बैग वगैरह बनाते हो, उसको धोने में, उसको साफ करने में कितना पानी बर्बाद हो रहा है? और भी कई फैक्टरियों में पानी बर्बाद होता है। तो कभी उस तरफ किसी का ध्यान गया? जाना चाहिए, सिर्फ एक हमारा त्यौहार है होली, हम नहीं कहते कि उसमें पानी बर्बाद करो, पर अगर थोड़ा सा पानी उसमें आप प्रयोग में लाएं तो त्यौहार भी मन जाए और पानी की बर्बादी भी ना हो। पर शोर उसी दिन क्यों मचता है? आम दिनों में क्यों नहंी बात उठती? कि भई शराब से इतना पानी बर्बाद हो रहा है, चमड़ा धोने में इतना पानी बर्बाद हो रहा है, फैक्टरियों में इतना पानी बर्बाद हो रहा है। कोई उठता है इस बारे में सोचता है। हर इन्सान को सोचना चाहिए, तभी तो समाज और देश का भला होगा।

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