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    एलजी का सही निर्णय

    Lieutenant Governor of Delhi

    दिल्ली के राज्यपाल अनिल बैजल ने केजरीवाल सरकार का दिल्ली में केवल दिल्ली के ही मरीजों का ईलाज होने का निर्णय पलटकर एक अच्छा व मानवता के हित में निर्णय लिया है। अगर केजरीवाल सरकार का निर्णय लागू हो जाता तो इससे देश में बहुत ही बुरा संदेश जाना था व उन मरीजों के लिए भी कई नई मुश्किलें खड़ी हो जाती जिनका ईलाज दिल्ली के अस्पतालों में चल रहा था। असल में लॉकडाऊन से पूरे देश में ही ईलाज की काफी समस्याएं सामने आई हैं। कई प्राईवेट अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को डिलवरी के समय भर्ती करने से इन्कार कर दिया और जगह जगह भटकते हुए कई गर्भवती महिलाओं की मौत भी हो गई।

    इसके अलावा अन्य रोगों वाले मरीजों को कुछ प्राईवेट अस्पतालों ने मना कर दिया व आखिर राज्य सरकारों को प्राईवेट अस्पतालों के प्रबंधकों के साथ पूरी सख्ती के साथ पेश आना पड़ा। ऐसी हालत में केजरीवाल सरकार का निर्णय न केवल कानूनन बल्कि नैतिक तौर पर भी मानवता के खिलाफ था। कानून मुताबिक कोई भी नागरिक देश के किसी भी अस्पताल में अपना ईलाज करवा सकता है। भारतीय विचारधारा भी दूसरों की मदद को मनुष्य का धर्म मानती है। परोपकार भारतीय संस्कृति का आधार है, जहां घायल दुश्मनों पर भी मलहम लगाई जाती है। एक देश में दो-तीन देशों जैसा सिस्टम नहीं चल सकता। सरकार का अस्तित्व ही नागरिकता की सेवा व सुविधा के लिए है।

    लॉकडाऊन का मतलब देशवासियों को बचाना है तो किसी मरीज का ईलाज करने से मना कर देना अपने आप में लॉकडाऊन की महत्तता को खत्म करना है। इस मामले में किसी भी तरह की राजनीति नहीं की जानी चाहिए। केन्द्र व राज्य सरकारों को मिलकर कोविड-19 महामारी के साथ निपटने के लिए कदम उठाने चाहिए। जो राज्य अच्छे कार्य कर रहे हैं, उनसे मार्गदर्शन लेना चाहिए। यह भी जरूरी है कि राज्य राजनीति खेल में ना पड़कर अपनी रणनीति व तर्जुबे सांझे करें ताकि इस फैल रही बीमारी को रोका जा सके। महाराष्टÑ, राजस्थान, तामिलनाडू, दिल्ली, उत्तर प्रदेश व गुजरात की हालत भी मौजूदा समय में बहुत ही बुरी है व दोबारा लॉकडाऊन की भी चर्चा चल रही है। ऐसे स्थिति में कोरोना को नियंत्रण में लाने वाले राज्य अधिक प्रभावित राज्यों को साथ दें। हर नागरिक कीमती है। इसलिए किसी भी मरीज का राज्य, भाषा, धर्म नहीं देखा जाना चाहिए।

     

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