संगरिया (सच कहूँ/सुरेन्द्र जग्गा)। डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए डेरा प्रेमी समाज में मानवता की मिसाल पेश कर रहे हैं। इसी कड़ी में सेवादारों ने डेढ़ साल से लापता पश्चिम बंगाल के एक युवक को उसके परिवार से मिलवाया है। Sangaria News
शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के सेवादारों ने न केवल युवक की सुध ली, बल्कि उसे सुरक्षित उसके घर तक भी पहुँचाया। 24 जनवरी 2026 को जब हनुमानगढ़ निवासी सेवादार जसकरण इन्सां, इंद्रसेन इन्सां, गौरव इन्सां और रमन इन्सां को हनुमानगढ़ रोड पर एक 26 वर्षीय युवक मिला। जिसकी हालत अत्यंत दयनीय थी और वह मानसिक रूप से काफी परेशान व था। सेवादारों ने तुरंत उसे संगरिया के एमएसजी डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केंद्र पहुँचाया और इसकी सूचना संगरिया पुलिस थाना में दी।
मानवता भलाई केंद्र में सेवादारों ने युवक की कटिंग-शेव करवाई

मानवता भलाई केंद्र में सेवादारों ने युवक की कटिंग-शेव करवाई, उसे नहलाया और नए कपड़े व भोजन उपलब्ध कराया। इस नि:स्वार्थ सेवा के कुछ दिनों बाद युवक की स्थिति में सुधार हुआ और उसने अपना नाम अजमुद्दीन बताया। इसके बाद सेवादार रामफल इन्सां ने स्थानीय बंगाली युवकों (नसरुद्दीन व राजा) के सहयोग से युवक के घर का पता लगाया। अजमुद्दीन के लौटने पर पूरे गाँव में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों ने भावुक होते हुए पूज्य गुरु जी और उनके सेवादारों का आभार व्यक्त किया। Sangaria News
उन्होंने कहा कि ऐसे गुरु जी और सेवादार धन्य हैं, जो इतनी दूर आकर मानवता का धर्म निभा रहे हैं। इस पुनित कार्य में मुख्य रूप से शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के जिम्मेवार भाई लालचंद इन्सां, महेश गोयल इन्सां सच्ची प्रेमी समिति सेवादार गुरचरण खोसा इन्सां, लवली गर्ग इन्सां, सोनू गोयल इन्सां, अमराराम इन्सां, सुखदेव इन्सां, बंगाल के सच्चे नम्र सेवादार राधेश्याम इन्सां, बंगाल के युवक राजा, सुरेन्द्र, जग्गा इन्सां व विनोद हांडा इन्सां का सहयोग रहा।
आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण नहीं आ सका परिवार | Sangaria News

जांच में पता चला कि अजमुद्दीन पश्चिम बंगाल के जिला होगले के गाँव दौलतपुर का निवासी है। जब वीडियो कॉल पर उसकी माँ ने डेढ़ साल बाद बेटे का चेहरा देखा, तो उनकी आँखों में आँसू छलक आए। परिजनों ने बताया कि वह मानसिक परेशानी के चलते बिना बताए घर से निकल गया था। हालाँकि, परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब होने के कारण कोई भी सदस्य राजस्थान आने में समर्थ नहीं था।
परिजनों की विवशता को देखते हुए सेवादार लालचंद इन्सां और महेश गोयल इन्सां ने खुद बंगाल जाने का बीड़ा उठाया। सेवादारों ने लगभग 4000 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया और वहाँ के जिम्मेवारों की मौजूदगी में अजमुद्दीन को उसके बूढ़े माता-पिता, पत्नी और छोटी बच्ची को सुरक्षित सौंप दिया। Sangaria News















