हमसे जुड़े

Follow us

27.8 C
Chandigarh
Monday, March 23, 2026
More

    धारा 124-ए

    124-a
    धारा 124-ए के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति देश की सरकार के विरोध में कुछ बोलता या लिखता है या फिर ऐसी सामग्री का समर्थन करता है या राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करने के साथ संविधान को नीचा दिखाने की गतिविधि में शामिल है तो उसे उम्रकैद की सजा हो सकती है। वहीं देश के सामने संकट पैदा करने वाली गतिविधियों के समर्थन करने, प्रचार-प्रसार करने पर भी राजद्रोह का मामला हो सकता है। राजद्रोह की परिभाषा में यह नहीं बताया गया है कि इन गतिविधियों से होने वाले खतरे को कैसे मापा जाएगा। लंबे समय से इसके अस्पष्ट प्रावधानों को दूर करने की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई प्रयास नहीं हुआ है। साल 1837 में लॉर्ड टीबी मैकाले के नेतृत्व वाले पहले विधि आयोग ने आईपीसी तैयार की थी। इसमें राजद्रोह से जुड़ा कोई कानून नहीं था। बाद में 1870 में अंग्रेजी सरकार ने आईपीसी के छठे अध्याय में धारा 124-ए को शामिल किया।
    उसके बाद और आजादी से पहले के समय तक भारतीय राष्ट्रवादियों और स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ इस कानून का इस्तेमाल किया गया। अंग्रेजी सरकार उन्हें चुप कराने के लिए इस कानून के तहत जेल में डाल देती थी। ब्रिटेन ने 2009 में देशद्रोह का कानून खत्म किया और कहा कि दुनिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में है। आस्ट्रेलिया ने 2010, स्काटलैंड ने भी 2010, दक्षिण कोरिया ने 1988, इंडोनेशिया ने 2007 में देशद्रोह के कानून को खत्म कर दिया। वहां संविधान में देशद्रोह का जिक्र नहीं। देशद्रोह की अवधारणा औपनिवेशिक सोच और समय की है। जिसकी आजाद भारत में कोई जगह नहीं है।

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।