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Friday, February 27, 2026
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    गांव दीवाना के बच्चे मोबाईल का नहीं बल्कि कसरत व पुस्तकें पढ़ने का रखते हैं शौंक

    Village-Diwana

    पंचायत ने सैलरी पर एक प्रशिक्षक भी रखा है, ग्राउंड में एक छोटी लाइब्रेरी भी बनाई गई (Village Diwana)

    • ग्रामीणों ने अपनी निजी रूचि से पंचायत के सहयोग से बनवाया खेल ग्राउंड

    सच कहूँ/जसवीर गहल बरनाला। जिला बरनाला के गांव दीवाना के ग्रामीणों ने एक और अनोखा काम कर दिखाया है। ग्रामीण बच्चों के भविष्य के प्रति चिंतित होकर अब अपनी निजी रूचि से गांव की ग्राम पंचायत के नेतृत्व में प्रवासी पंजाबियों के सहयोग से गांव में खेल ग्राऊंड स्थापित कर बच्चों के भविष्य को संवारने का प्रशंसनीय प्रयास किया है। जहां आजकल क्षेत्र भर के बच्चे अपना भविष्य बनाने के लिए अपना पसीना बहा रहे हैं।

    Village-Diwana-1

    95 प्रतिशत लोग शिक्षित, बच्चों का भविष्य संवारने का उठाया बीड़ा

    • गांव दीवाना की आबादी चार हजार के करीब है, जिसमें से 95 प्रतिशत लोग शिक्षित हैं।
    • अपनी प्रगतिशील विचारधारा का बखूबी प्रदर्शन कर रहे हैं
    •  नशों व गैंगस्टर आदि की तरफ बढ़ रही युवा पीढ़ी को बचाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
    • मोबाईल के इस युग में युवाओं के लिए अच्छा साहित्य व खेल मैदान ही एकमात्र रास्ता है।

    इसी उद्देश्य से गांव के सरपंच रणधीर सिंह के नेतृत्व में समूह ग्राम पंचायत ने ग्रामीणों व विदेशों में रहते प्रवासी पंजाबियों के सहयोग से खेल मैदान तैयार कर अपनी नेक नीयत का सबूत दिया है, ताकि क्षेत्र के तकरीबन चार दर्जन बच्चे रोजाना यहां पहुंचकर अपना भविष्य संवारने के लिए शारीरिक मेहनत के साथ-साथ सुखद जीवन जी रहे हैं।

    तीन गांवों में बच्चे रोजाना पहुंच रहे 

    इस खेल ग्राउंड में इस वक्त तकरीबन तीन गांवों के 60 से अधिक बच्चे आते हैं और अपने पसंसदीदा खेलों के अलावा शारीरिक और मानसिक तंदरूस्ती के लिए मन लगाकर मेहनत करते हैं। ग्राउंड की दीवारों पर महान खिलाड़ियों की बनी तस्वीरें जिंदगी में कुछ कर गुजरने का जोश भरती नजर आतीं हैं। ग्रामीणों ने बच्चों के लिए अपने खर्च पर एक प्रशिक्षक भी नियुक्त किया है जो रोजाना एथलैटिक्स के साथ-साथ शारीरिक मेहनत के तरीकों से बच्चों को अवगत करवाता है। ग्राउंड में ही एक लघु पुस्तकालय भी स्थापित है जो खेलों के साथ बच्चों को साहित्य पढ़ने के लिए भी प्रेरित करती है।

    फेसबुक से दूसरी पंचायतों को कर रहे जागरूक

    गांव के ही प्रगतिशील सोच वाले जगसीर वडिंग, गुरदीप सिंह फौजी, बलराज सिंह ढिल्लों, वरिन्दर दीवाना और गुरदीप सिंह दीपा युवाओं द्वारा ‘दीवाना ग्राउंड’ के नाम पर एक फेसबुक पेज बनाया है, जिसकी मदद से वे नजदीकी गांवों के बच्चों को ग्राउंड का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करते हैं। वे दूसरे गांवों की पंचायतों को भी ऐसे प्रयासों के लिए एकजुट होने का भी न्योता दे रहे हैं। ग्राउंड के निर्माण के लिए प्रवासी भारतीयों ने 9 लाख रुपए, मनरेगा से 17 लाख, 14वें वित्त कमीशन से 4. 87 लाख रुपए और ग्रामीणों द्वारा समय-समय पर तन व धन से भरपूर सहयोग दिया गया है।

    गांव का सर्वपक्षीय विकास, मेरा पहला फर्ज : सरपंच

    Village-Diwana-सरपंच रणधीर सिंह ने कहा कि गांव का सर्वपक्षीय विकास व जरूरी सुविधाएं गांव में उपलब्ध करवाना मेरा पहला फर्ज है, जिसके लिए वह निरंतर प्रयत्नशील हैं और इस कार्य के लिए ग्रामीण भी उनका पूर्ण सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने गांव के शेष लंबित कार्यों के लिए पंजाब सरकार से अनुदान की मांग की है।

    गांव में उपलब्ध हैं यह सुविधाएं

    • गांव में पीने के लिए शुद्ध पानी का प्रबंध
    • सरकारी व प्राथमिक स्कूल
    • बस स्टैंड को आधुनिक दिशा दी गई
    • गांव में लघु पीएचसी व पशु अस्पताल
    • भाई घन्हैया सेवा सोसायटी की एम्बूलैंस सेवा
    • युवक सेवा क्लब चला रहा सहारा लैब
    • ‘युवा टीम दीवाना’ द्वारा फ्लड लाईटें, शीशे, स्पीड ब्रेकर व पौधे लगाए जाते हैं।

    गांव की शान ‘पुस्तकालय’

    गांव में 2011 से चल रही शहीद करतार सिंह सराभा यादगारी पुस्तकालय में नजदीक के 30 गांवों के पाठकों का आना-जाना है। इसके साथ ही पुस्तकालय प्रबंधकों द्वारा समय-समय पर बच्चों के बहुपक्षीय विकास के लिए बाल समर कैंप, प्रेरणादायक फिल्में, किताबों के रिव्यू लिखवाना, सुंदर लेखन और ज्ञान मुकाबले करवाए जाते हैं। पुस्तकालय प्रबंधकों ने ग्रामीणों के सहयोग से सार्वजनिक स्थानों पर साहित्यक बाल पेंटिंग बनवाई गई हैं जो क्षेत्र सहित देश-विदेश में चर्चा का विषय है।

    गांव को फंड की कमी

    गांव के स्कूल को अपडेट कर 12वीं तक करने, पार्क, आंगणवाड़ी सैंटर, पुस्तकालय व डाकखाना की इमारत के लिए, ग्राउंड के लिए ओपन जिम, जिम हाल, खेल का सामान व बॉस्केटबाल इत्यादि की कमी है। गांव की दशा संवारने के साथ-साथ ग्रामीणों व बच्चों को समूह सुविधाएं गांव में ही प्राप्त हो सकें। गांव की लघु पीएचसी में नियमित डॉक्टर की कमी भी है।

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