Crude Oil Price Hike: मुंबई। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। ऊर्जा बाज़ार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। खाड़ी देशों से विश्व के बड़े हिस्से को कच्चा तेल प्राप्त होता है, इसलिए किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकती है। विश्लेषकों के अनुसार गैर-खाड़ी क्षेत्रों से होने वाली आपूर्ति, खाड़ी देशों के संभावित घाटे की पूरी भरपाई करने में सक्षम नहीं होगी। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमतों में तेज़ उछाल की आशंका व्यक्त की जा रही है। US-Iran War Updates
होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्र
Strait of Hormuz विश्व के प्रमुख समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। ईरान और ओमान के बीच स्थित इस जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का परिवहन होता है। अभी तक जहाजों की आवाजाही बाधित होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, किंतु संभावित जोखिमों के कारण कई प्रमुख तेल व्यापारियों ने परिवहन अस्थायी रूप से रोकने या सीमित करने का निर्णय लिया है।
टैंकरों की ढुलाई दरों में पहले ही उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मध्य पूर्व से चीन तक जाने वाले बड़े तेल वाहकों के किराए में इस वर्ष तीन गुना तक वृद्धि हो चुकी है, जो बढ़ते जोखिम को दर्शाता है।
ऊर्जा ढांचे पर हमले की आशंका
अब तक किसी बड़े तेल या गैस संयंत्र पर प्रत्यक्ष हमले की पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि कुछ खाड़ी देशों में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। विशेष रूप से Kharg Island के समीप धमाकों की सूचनाएं मिली हैं, जो ईरान के प्रमुख निर्यात टर्मिनलों में गिना जाता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऊर्जा अवसंरचना को प्रत्यक्ष लक्ष्य बनाया गया या समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहे, तो आपूर्ति में कमी का स्तर अधिक गंभीर हो सकता है। विश्लेषकों ने 1980 के दशक में हुए Iran-Iraq War का उल्लेख करते हुए कहा कि अल्पकालिक संघर्षों ने भी उस समय तेल की कीमतों में व्यापक उतार-चढ़ाव पैदा किया था। वर्तमान परिस्थिति में भी बाज़ार मनोवैज्ञानिक दबाव में है और किसी भी नई घटना से कीमतों में तीव्र परिवर्तन संभव है।
Islamic Revolutionary Guard Corps ने हाल में पश्चिम एशिया में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाने की घोषणा की है। यह कदम हालिया सैन्य कार्रवाइयों के प्रत्युत्तर के रूप में बताया जा रहा है। स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें खाड़ी क्षेत्र पर टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास शीघ्र प्रारंभ नहीं हुए तो ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता और बढ़ सकती है, जिसका प्रभाव वैश्विक मुद्रास्फीति और व्यापार पर पड़ेगा। US-Iran War Updates














