नई दिल्ली। मृत सागर विश्व की सबसे विलक्षण झीलों में गिना जाता है। इसका नाम सुनते ही जिज्ञासा उत्पन्न होती है कि इसे “मृत” क्यों कहा जाता है। इसका कारण है इसका अत्यधिक खारापन, जिसके कारण यहां सामान्य जलीय जीवन संभव नहीं है। मृत सागर का जल सामान्य समुद्री जल की तुलना में लगभग 8 से 10 गुना अधिक खारा है। अत्यधिक लवणता के कारण यहां मछलियां, जलीय पौधे और अधिकांश सूक्ष्म जीव जीवित नहीं रह पाते। इसी कारण इसे “मृत सागर” कहा जाता है। यह जलाशय Israel और Jordan की सीमा पर स्थित है। यह पृथ्वी की सतह पर समुद्र तल से लगभग 400 मीटर (करीब 1,300 फीट) नीचे स्थित है, जिससे इसे धरती का सबसे निचला स्थल माना जाता है। NASA News
पानी में डूबना लगभग असंभव
उच्च लवणता के कारण इसके जल का घनत्व अत्यधिक है। परिणामस्वरूप कोई भी व्यक्ति या वस्तु इसमें आसानी से तैर सकती है। यही कारण है कि यहां पर्यटक जल की सतह पर लेटकर पुस्तक पढ़ते हुए भी देखे जाते हैं। अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों में भी इसके रंगों की विविधता स्पष्ट दिखाई देती है। NASA के लैंडसैट उपग्रहों द्वारा वर्षों में ली गई छवियों में गहरे नीले, हल्के गुलाबी और चमकीले रंग दिखाई देते हैं। मध्य में स्थित लिसान प्रायद्वीप इसे दो भागों में विभाजित करता है, जो प्राकृतिक पुल जैसा प्रतीत होता है।
गर्मी के मौसम में तीव्र वाष्पीकरण के कारण यहां जलस्तर प्रतिदिन 2 से 3 सेंटीमीटर तक कम हो सकता है। पिछले कई दशकों में इसका स्तर उल्लेखनीय रूप से घटा है। औद्योगिक गतिविधियां और खनिज निष्कर्षण परियोजनाएं भी इसके सिकुड़ने के कारणों में सम्मिलित हैं। Dead Sea
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व | NASA News
मृत सागर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। प्राचीन मिस्र में इसके नमक का उपयोग ममी संरक्षण तथा उर्वरक निर्माण में किया जाता था। आधुनिक समय में यहां से प्राप्त सोडियम क्लोराइड और पोटाश का उपयोग जल शोधन, बर्फ हटाने और प्लास्टिक निर्माण में किया जाता है। साथ ही, 20वीं शताब्दी के मध्य में यहां की गुफाओं से ‘डेड सी स्क्रॉल्स’ नामक प्राचीन पांडुलिपियां प्राप्त हुई थीं, जो धार्मिक इतिहास की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं।
वैज्ञानिक संस्थान, विशेषकर NASA और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, उपग्रह आंकड़ों के माध्यम से इसके बदलते स्वरूप पर निरंतर निगरानी रखते हैं। मृत सागर केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि प्राकृतिक, ऐतिहासिक और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जिसकी संरक्षण की आवश्यकता समय की मांग है। NASA News















