US-Venezuela Strikes Updates: वॉशिंगटन। वेनेजुएला में शनिवार को हुए तीव्र सैन्य हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आई है। ट्रंप ने दावा किया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी अब अमेरिका की हिरासत में हैं। उन्होंने यह बात अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रूथ सोशल’ पर साझा की। US-Venezuela Strikes
ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला के विरुद्ध व्यापक सैन्य कार्रवाई की है और इस अभियान के दौरान राष्ट्रपति मादुरो को उनकी पत्नी के साथ देश से बाहर ले जाया गया है। हालांकि, इस दावे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
उधर, वेनेजुएला के रक्षा मंत्रालय ने इन घटनाओं को अमेरिका द्वारा किया गया गंभीर सैन्य आक्रमण बताया है। रक्षा मंत्री की ओर से जारी बयान में कहा गया कि 3 जनवरी की तड़के वेनेजुएला को अमेरिकी सरकार की ओर से अब तक के सबसे आक्रामक और आपराधिक हमलों का सामना करना पड़ा। इसके बाद देश में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया गया है। US-Venezuela Strikes
पृष्ठभूमि मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े आरोपों से जुड़ी मानी जा रही
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े आरोपों से जुड़ी मानी जा रही है। अमेरिका लंबे समय से वेनेजुएला पर ड्रग्स की अवैध तस्करी को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देता आया है। हाल के दिनों में कैरेबियन सागर क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियों में भी बढ़ोतरी देखी गई थी। दबाव बनाने के उद्देश्य से अमेरिका ने वेनेजुएला की तेल कंपनियों और उनसे जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध भी लगाए थे।
अमेरिकी प्रशासन का यह भी आरोप रहा है कि वेनेजुएला से बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ अमेरिका भेजे जा रहे हैं और इसके लिए सीधे तौर पर राष्ट्रपति मादुरो को जिम्मेदार ठहराया गया है। इसी क्रम में अमेरिका ने मादुरो और उनके परिवार से जुड़ी संपत्तियों को जब्त या फ्रीज करने की कार्रवाई भी की थी। US-Venezuela Strikes
वहीं, वेनेजुएला की ओर से लगातार यह आरोप लगाया जाता रहा है कि अमेरिका उसके आंतरिक राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप करता है और सत्ता को प्रभावित करने का प्रयास करता रहा है। दोनों देशों के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण तेल भी माना जाता है। वर्ष 1976 में वेनेजुएला ने अपने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया था, जिसके बाद सभी विदेशी कंपनियों की गतिविधियां सरकारी तेल कंपनी पेट्रोलियोस डी वेनेजुएला के अधीन आ गईं। इस निर्णय से अमेरिकी हितों को गहरा झटका लगा और तभी से दोनों देशों के संबंधों में कटुता बढ़ती चली गई।















