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    पौने तीन सौ करोड़ की लागत से बनाई जा रही है ये …हालत ऐसी आप हैरान हो जाओगे, जानिये

    Pratap Nagar
    Pratap Nagar पौने तीन सौ करोड़ की लागत से बनाई जा रही है ये ...हालत ऐसी आप हैरान हो जाओगे, जानिये

    प्रताप नगर, सच कहूं राजेंद्र कुमार। सिंचाई विभाग के अंतगर्त पौने तीन सौ करोड़ की लागत से दादुपुर हैड से बनाई जा रही पीएलसी यानी पेरलल लिंक चैनल की हालत दादुपुर हैड से ही खस्ता होती जा रही है। नई नहर के कई जगह से किनारे बह चुके है लगातार बारिश में कहीं न कहीं से कटाव हो रहा है व किनारे टूट कर नहर में बह रहे है। यहीं नहीं दादपुर में खारवन सड़क की ओर से नई नहर के टूटे किनारे को बचाने के लिए सड़क के साथ जंगल से मिटटी को मशीनों की सहायता से खोदा जा रहा है उस मिटटी से बैग भर किनारों का बचाव किया जा रहा है मगर उसकी वजह से कई जगह जंगल से पेड़ टूट गए हैं। नहर में दादुपुर गांव की ओर भी कई जगह किनारे टूट चुके है। इससे पहले हैड पर बने पार्क की एक साइड टूट कर पानी में बह चुकी है।

    दादुपुर हैड से बनाई जा रही नई नहर में इस्तेमाल की गई सामग्री की क्वालिटी की हालत नहर की शुरुआत से ही दिखाई देने लगी है। हैड पर नई नहर के किनारे कई जगह टूट कर पानी में बह गए है, जबकि नहर में अभी पानी का बहाव भी बहुत कम है। नहर के किनारे बहने के साथ् कई जगह नहर बुरी तरह से उखड़ गई है। कंक्रीट से बनी इन साइड की दीवारों को रोकने के लिए कई जगह कटटे लगाए जा रहे हैं। इन कटटों में साथ के जंगल या पेड़ों के नीचे से मिटटी खोद कर भरी जा रही है । यानी जंगल से मिटटी का खनन किया जा रहा है। इससे कई जगह पेड उखाड दिए गए हैं। कई जगह पेड़ों की जड़ें तक दिखाई दे रही है। जबकि मिटटी को बाहर से लाया जाना चाहिए

    वहीं दादुपुर गांव की ओर बनाई नहर के किनारे भी कई जगह से टूट गए हैं या बह गए हैं। हालात ऐसी लग रही है कि अगर मानसून में भारी बारिश हो गई तो हालत क्या होगी। दादूपुर से गुरमेज सिंह चमन लाल ,रमेश चंद, जसबीर आदि का कहना है कि इस नहर की देख-रेख करने वाला कोई नहीं लगता। हैड पर वाटर सर्विसेज डिविजन का पूरा स्टाफ मौजूद रहता है वहां पर ही हालात खराब होते जा रहे हैं।

    इस बारे में सिंचाई विभाग के एसडीओ रुबन गर्ग ने बताया कि उनकी जानकारी में ऐसा नहीं है मगर जहां-जहां से नुकसान हुुआ है तो उसको दोबारा से ठीक किया जाएगा। इसके साथ ही अभी नहर का कार्य कंप्लीट नहीं हुआ है। अब सवाल यह है कि अगर ऐसी ही गुणवता से नहर बनाई गई तो यह कब तक टिक पाएगी।