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    घर-घर लगी शिक्षा की पहचान, खेड़ा गनी की बहु-बेटियों ने रच दिया सशक्तिकरण का नया अध्याय

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    Naraingarh News:घर-घर लगी शिक्षा की पहचान, खेड़ा गनी की बहु-बेटियों ने रच दिया सशक्तिकरण का नया अध्याय

    शिक्षित नारी, सशक्त गांव खेड़ा गन्नी का प्रेरक प्रयोग

    • खेड़ा गन्नी पंचायत की अनूठी पहल, शिक्षित बहु-बेटियों को मिला सार्वजनिक सम्मान

    नारायणगढ़ (सचकहूँ/सुरजीत कुराली)। Naraingarh News: गांव खेड़ा गन्नी महिला सशक्तिकरण का प्रेरक मॉडल बन चुका है। यहां ग्राम पंचायत ने न केवल शिक्षित बहु-बेटियों को पहचान दी, बल्कि उनका सम्मान अनूठे तरीके से किया है। अम्बाला जिले के नारायणगढ़ उपमंडल के शहजादपुर खण्ड़ के छोटे से गांव खेड़ा गनी ने इसे जमीन पर उतारकर एक मिसाल कायम की है।

    खेड़ा गन्नी गांव में आज हर गली, हर मोहल्ला यह संदेश दे रहा है कि शिक्षा ही सशक्तिकरण की सबसे मजबूत नींव है। गांव की शिक्षित महिलाओं के घरों के बाहर लगी नाम-प्लेटें, जिन पर उनके नाम के साथ उनकी शैक्षणिक योग्यता अंकित है, अब गांव की पहचान बन चुकी हैं।

    महिला ग्राम सभा से जन्मी एक प्रेरणादायक सोच | Naraingarh News

    सरपंच प्रवीण धीमान बताते है कि इस अनूठी पहल की नींव नवम्बर 2025 में आयोजित महिला ग्राम सभा में पड़ी। इस विशेष ग्राम सभा में बतौर मुख्य अतिथि एच.आई.आर.डी. के निदेशक डॉ. वीरेंद्र चौहान उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभागए महिला पुलिस थानाए प्रोटेक्शन अधिकारीए महिला एवं बाल विकास विभाग सहित विभिन्न विभागों की महिला अधिकारियों ने भाग लिया।

    इस दौरान ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छता, स्वास्थ्य, महिला कानूनों, अधिकारों व सोलर रूफटॉप सिस्टम, सामाजिक उत्थान और सशक्तिकरण के विषय में जागरूक किया गया।

    संवाद के इसी क्रम में यह विचार सामने आया कि गांव में यह जाना जाए कि कितनी महिलाएं और बेटियां उच्च शिक्षित हैं, ताकि उन्हें एक मंच और पहचान मिल सके।

    सर्वे से सामने आई गांव की असली तस्वीर

    महिला ग्राम सभा में लिए गए निर्णय के अनुसार ग्राम पंचायत ने गांव में एक विशेष सर्वे कराया। सरपंच प्रवीण धीमान के अनुसार खेड़ा गन्नी गांव में कुल छह वार्ड हैं और लगभग 400 की आबादी है। सर्वे के परिणाम चौंकाने वाले और गर्व करने वाले थे।

    सर्वे में सामने आया कि गांव की महिलाएं और बेटियां एम.ए., एम.बी.ए., एम.एस.सी., बी.एड., एम.बी.ए. तथा बी.कॉम. जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यताएं प्राप्त कर चुकी हैं। इसके बाद पंचायत ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया कि इन महिलाओं को केवल आंकड़ों तक सीमित न रखकर, उन्हें सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाए।

    नाम के साथ शैक्षणिक योग्यताएं पहचान बनी नेम प्लेट

    ग्राम पंचायत द्वारा ऐसी 30 शिक्षित महिलाओं की नाम-प्लेटें बनवाकर उनके घरों के बाहर लगवाई गई। इन प्लेटों पर महिला का नाम और उसकी शैक्षणिक योग्यता अंकित है। यह पहल केवल सम्मान नहीं, बल्कि गांव की हर बच्ची के लिए एक चलती-फिरती प्रेरणा बन गई है।

    महिलाओं की जुबानी सम्मान की अनुभूति

    सिमरन सैनी (बी.कॉम.) कहती हैं, घर के बाहर अपनी नेम प्लेट देखकर गर्व महसूस होता है। यह पंचायत का बहुत अच्छा प्रयास है, जिससे महिलाओं को आगे बढऩे की प्रेरणा मिलेगी। Naraingarh News

    तमन्ना धीमान (बी.कॉम.) का कहना है कि यह पहल उन लड़कियों के लिए प्रेरणादायक है, जो 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं। अब गांव में हर बच्ची देख सकती है कि पढऩे से पहचान मिलती है। निशा देवी (बी.कॉम.) कहती हैं, जब घर के बाहर नाम और शिक्षा लिखी नेम प्लेट दिखती है, तो लगता है कि गांव की हर गली में शिक्षित नारियां हैं। एक शिक्षित महिला पूरे परिवार और आने वाली पीढिय़ों को शिक्षित करती है।

    रजनी सैनी (बी.ए., बी.एड., एनटीटी) के अनुसार, इस पहल से न केवल लड़कियां बल्कि अभिभावक भी बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित होंगे। यह पंचायत का दूरदर्शी कदम है।

    सामूहिक प्रयास से मिली सफलता

    इस पहल को सफल बनाने में पंचायत सदस्य मनोज कुमार, अनिल कुमार, रूबल देवी, नीतू, पूजा तथा ग्राम सचिव लोकवीर की अहम भूमिका रही। गांव की महिलाएं इस सम्मान के लिए ग्राम पंचायत का आभार व्यक्त कर रही हैं।

    खेड़ा गन्नी बना उदाहरण

    खेड़ा गन्नी की यह पहल साबित करती है कि अगर सोच सकारात्मक हो और नेतृत्व संवेदनशील, तो छोटे गांव भी बड़े बदलाव की शुरुआत कर सकते हैं। आज यह गांव न केवल अपने विकास पर गर्व कर रहा है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी महिला सशक्तिकरण का प्रेरक मॉडल बन चुका है।

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