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    नौकरी और पैसों के लिए 2022 में 3.7 लाख लोगों ने छोड़ा भारत

    विदेशों में बसने की चाह बढ़ रही, अकेले पंजाब से 10 हजार 654 लोग विदेशों में बस गए

    नई दिल्ली (एजेंसी)। 14 मार्च को लोकसभा में पेश किए गए दस्तावेज में कहा गया है साल 2022 में इमिग्रेशन एक्ट, 1983 के तहत 3,73,434 भारतीयों का इमिग्रेशन क्लियरेंस जारी किया गया, जिनमें से 10,654 लोग पंजाब से थे। हमारे देश में एक वक्त ऐसा था, जब दुनियाभर से लोग यहां आते थे। सातवीं शताब्दी में चीन से ह्वेनसांग का भारत आना हो, 11वीं शताब्दी में अलबरूनी का या फिर 14वीं शताब्दी में इब्न बतूता का आगमन हो। हमारे देश की विरासत ऐसी रही है कि दुनियाभर से लोग यहां आते थे।

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    लेकिन समय का पहिया घूमता है और फिर ये ऐसा घूमता है कि चीजें बिल्कुल उलट हो जाती हैं। वर्तमान समय में ऐसा ही देखने को मिल रहा है, जब लाखों की संख्या में भारतीय देश छोड़कर विदेशों का रुख कर रहे हैं। 14 मार्च को लोकसभा में पेश किए गए दस्तावेज में कहा गया है साल 2022 में इमिग्रेशन एक्ट, 1983 के तहत 3,73,434 भारतीयों का इमिग्रेशन क्लियरेंस जारी किया गया, जिनमें से 10,654 लोग पंजाब से थे।

    इन 18 देशों में जा रहे हैं भारतीय

    इमिग्रेशन एक्ट, 1983, भारत के नागरिकों को विदेशों में रोजगार करने का अवसर प्रदान करता है। इस कानून के तहत 18 देशों में भारतीय को रोजगार के लिए इमिग्रेशन क्लियरेंस जारी किया जाता है। यह देश हैं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, इंडोनेशिया कतर, ओमान, कुवैत, बहरीन, मलेशिया, लीबिया, जॉर्डन, यमन, सूडान, दक्षिण सुडान, अफगानिस्तान, इंडोनेशिया, सीरिया, लेबनान और थाईलैंड। एक सवाल के जवाब में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, ‘‘2001-2011 के दौरान पंजाब राज्य में जनसंख्या की दशकीय वृद्धि दर 13.9 है।

    वहीं ई-माइग्रेट पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार साल 2022 में अखिल भारतीय स्तर पर कुल 3,73,434 इमिग्रेशन क्लीयरेंस जारी किए गए थे जिसमें 10,654 क्लियरेंस केवल पंजाब से जारी किए गए हैं।’’

    2020 तक 1.8 करोड़ भारतीय विदेशों में रह रहे थे

    संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट इस पलायन पर बेहद ही अच्छे तरीके से रोशनी डालती है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 तक 1.8 करोड़ भारतीय विदेशों में रह रहे थे। यहां गौर करने वाली बात ये है कि दुनियाभर में 3.2 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनका संबंध भारत से है। इसमें से 1.8 करोड़ तो सीधे तौर पर भारत के नागरिक हैं। हैरानी वाली बात ये है कि भारतीयों की जितनी आबादी विदेशों में है। उतनी तो कई देशों की जनसंख्या भी नहीं है।

    संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग के जनसंख्या प्रभाग द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन 2020 हाइलाइट्स’ की मानें, तो युक्त अरब अमीरात (वअए), अमेरिका और सऊदी अरब, ये तीन ऐसे देश है जहां भारतीय सबसे ज्यादा माइग्रेट हुए हैं। इसके अलावा, कनाडा, ब्रिटेन, आॅस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड भी ऐसे कुछ देश हैं, जहां पर भारतीय बसे हुए हैं। इनमें से ज्यादातर लोगों की देश छोड़ने की मुख्य वजह रोजगार, बेहतर जिंदगी और पैसा रही है।

    भारत की नागरिकता भी छोड़ रहे हैं लोग

    गृह मंत्रालय के अनुसार साल 2021 में 163,370 भारतीयों ने देश की नागरिकता छोड़ दी। संसद में बताया गया कि ऐसा फैसला इन लोगों ने “निजी वजहों” के कारण लिया है। अन्य देशों की तुलना में सबसे ज्यादा यानी 78,284 लोगों ने अमेरिकी नागरिकता के लिए भारत की नागरिकता छोड़ी। वहीं साल 23,533 लोगों ने आॅस्ट्रेलिया अपनी नई जिंदगी शुरू की है और 21,597 लोगों ने कनाडा की नागरिकता ली।

    चीन और पाकिस्तान में भी बस रहे हैं भारतीय लोग

    इसी रिपोर्ट के अनुसार साल 2021 में 300 लोगों ने चीन की नागरिकता ले ली, ये पहले से ही चीन में रह रहे थे जबकि और 41 लोगों ने पाकिस्तान की नागरिकता हासिल की। इसके अलावा साल 2020 की बात करें तो यहां भारत की नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या 85,256 थी और साल 2019 में 144,017 लोग अपने देश की नागरिकता छोड़ विदेश में बस गए।

    14 मार्च को लोकसभा में पेश किए गए दस्तावेज में कहा गया है साल 2022 में इमिग्रेशन एक्ट, 1983 के तहत 3,73,434 भारतीयों का इमिग्रेशन क्लियरेंस जारी किया गया, जिनमें से 10,654 लोग पंजाब से थे।

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