सच्चे संत जब भी धरती पर अवतरित हुए, हर परिस्थिति में उनका उद्देश्य एक ही रहा है ”मानवता का भला, इंसानियत की सेवा”। सच्चे संत खुद भी हक़ हलाल की कमाई करने के साथ-साथ इंसानियत की सेवा में अपना पूरा समय लगाते हैं और दूसरों को भी ऐसी ही प्रेरणा देते हैं।
बता दें कि कभी-कभी इतिहास तारीखों से नहीं बनता बल्कि तपस्या और मानवता की निस्वार्थ सेवा करके भी लिखा जाता है। ऐसा ही नजारा देखा गया पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) के सरसा निवास के दौरान 40 दिन का। जिनका हर दिन, हर पल इंसानियत-सृष्टि के कल्याण को समर्पित रहा।
सरसा की पावन धरा पर सेवा का महाकुंभ दिन रात चला
गत 40 दिनों के दौरान सरसा की पावन धरा पर न केवल सेवा का महाकुंभ दिन रात चला बल्कि न जाने कितनी तड़पती रूहों को सुकून भी मिला। डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने अपने 40 दिनों के रूहानी सफर के दौरान बिना विश्राम, बिना थकान की परवाह किए, सेवा का ऐसा महाकुंभ चलाया जोकि अध्यात्म और करुणा का जीवंत संगम बन गया। इन 40 दिनों में ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जहाँ हर सुबह मानवता के नाम और हर शाम समाज के उत्थान के संकल्प के साथ ढली। ये सेवा का महाकुंभ केवल कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं थी, बल्कि संवेदनाओं का प्रवाह था… दर्द को राहत देने का, निराशा को आशा में बदलने का और नशों में डूबे घर के चिरागों को फिर से रौशन करने का।
पूज्य गुरु जी के इन 40 दिनों का सबसे मार्मिक दृश्य वे चेहरे थे, जो कभी नशे की गिरफ्त में अपनी पहचान खो चुके थे। किसी मां की आंखों में बेटे को बचाने की अंतिम आस थी, किसी पत्नी ने वर्षों बाद पति को सुधरते देखा और किसी बच्चे ने पहली बार अपने पिता को होश में मुस्कुराते देखा।
ऐसे-ऐसे युवक-युवतियों ने नशा छोड़ दिया जो जिंदा लाश की तरह थे
नशे की गहरी खाई में गिर चुके इन लाखों लोगों को केवल पूज्य गुरु की पावन शिक्षा ही नहीं मिली बल्कि सहारा भी मिला। डेप्थ कैंपेन के तहत ऐसे-ऐसे युवक-युवतियों ने नशा छोड़ दिया जो जिंदा लाश की तरह थे। जिनके ठीक होने की उम्मीद परिवार छोड़ चुका था। लेकिन पूज्य गुरु जी के मार्गदर्शन और पावन वचनों के साथ राम नाम से जुड़कर लाखों घर इन 40 दिनों में नशों की गिरफ्त से आजाद हो गए। और इतना ही नहीं इस सेवा के महाकुंभ के दौरान लगातार आयोजित नि:शुल्क मेडिकल कैंपों में एलोपैथी, नेचुरोपैथी और आयुर्वेद के माध्यम से 10 हजार से अधिक गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिली। देशभर से 100 से अधिक स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं।
दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर और शिमला सहित विभिन्न महानगरों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पूज्य गुरु जी द्वारा आयोजित इन शिविरों को देश के लिए अत्यंत आवश्यक बताते हुए इसकी सराहना की। विशेष बात यह रही कि इन कैंपों का समस्त खर्चां पूज्य गुरु जी ने अपनी मेहनत और हक-हलाल की कमाई से वहन किया। इन कैंपों में गरीब मरीजों की नि:शुल्क जांच के साथ-साथ सी टी स्कैन और एमआरआई जैसे महंगे परीक्षण भी मुफ्त किए गए। महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता के लिए हजारों महिलाओं को स्वयं जांच (सेल्फ एग्जामिनेशन) का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे बीमारी की प्रारंभिक अवस्था में पहचान संभव हो सके।
अपनी नेक कमाई में से किसान के खेत में डूयूबलेब लगवाकर भी दिया
वहीं दूसरी ओर पूज्य गुरु जी ने इस दौरान मानवता भलाई कार्यों की श्रृंखला को भी गति दी। गरीब किसानों के दर्द को महसूस करते हुए पूज्य गुरु जी ने गरीब किसानों के लिए ट्यूबवेल लगाने की मुहिम का आगाज ही नहीं किया बल्कि सबसे पहले स्वयं अपनी नेक कमाई में से किसान के खेत में डूयूबलेब लगवाकर भी दिया। पूज्य गुरु जी की इस मदद से किसान की सूखी धरती को पानी मिला तो उम्मीद भी हरी हुई। यह सहायता केवल आर्थिक नहीं थी—यह आत्मनिर्भरता का संकल्प थी।
इसके साथ ही आप जी ने जरूरतमंद पत्रकारों, पुलिस कर्मचारियों और अन्य वर्गों को हर संभव सहायता देने का जो बीड़ा उठाया वो सराहनीय रहा। आप जी के आह्वान पर करोड़ों की साध संगत से इस मुहिम को सार्थक करने का सकंल्प भी लिया। इतना ही नहीं आप जी ने गरीब कन्याओं के विवाह करवाकर अपनी नेक कमाई से कन्यादान किया। और इन 40 दिनों में जो सबसे अलग दिखाई दिया, वह था कि एक संत, पीर फकीर ने अपनी सेहत की प्रवाह किये बिना दिन रात सृष्टि, समाज व हर वर्ग का उद्धार किया।















