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    पाकिस्तान जा रहा सतलुज का पानी रोक दे पंजाब : बलराज कुंडू

    बोले-आपसी भाइचारे से पानी का मुद्दा सुलझे तो बंद हो जाएंगे राजनीतिज्ञों के मुंह

    रोहतक (सच कहूँ/नवीन मलिक)। पंजाब एवं हरियाणा के बीच एसवाईएल को लेकर पिछले 35 सालों से राजनितिक दलों द्वारा की रही स्वार्थ की राजनीती को दो भाइयों को बांटने वाली राजनीति बताते हुए महम के निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा एवं हरियाणा व पंजाब के किसान नेताओं को एक पत्र भेजा है, जिसमें हमारे सबसे बड़े दुश्मन देश पाकिस्तान में व्यर्थ बहकर जा रहे सतलुज नदी के पानी को रोककर हरियाणा-राजस्थान की प्यासी भूमि को सिंचित करने का फार्मूला सुझाया है। साथ ही किसान नेताओं से आग्रह किया गया है कि 4 जनवरी को केन्द्र के साथ किसानों की होने वाली बैठक के एजेंडे में इस मुद्दे को शामिल किया जाये।

    विधायक कुंडू ने कहा कि किसानों द्वारा अपने किसान नेताओं के माध्यम से यह काम करने से सभी राजनीतिक दलों के मुँह भी बंद हो जाएंगे और पंजाब-हरियाणा का भाईचारा भी हमेशा के लिए मजबूत हो जाएगा। विधायक बलराज कुंडू ने पत्र में कहा है कि आज किसान आंदोलन के चलते एक बात जो निकलकर सामने आई है तथा जिसकी चर्चा पंजाब व हरियाणा में प्रत्येक व्यक्ति की जुबान पर है वो है हरियाणा-पंजाब का छोटे एवं बड़े भाई का रिश्ता।

    एसवाईएल

    हरियाणा प्रदेश का किसान-मजदूर पंजाब को अपना बड़ा भाई मानते हुए पंजाब के किसानों के स्वागत व सेवा में आँखें बिछाये लगा हुआ है। हरियाणा प्रदेश की भाजपा व जजपा सरकार ने एसवाईएल का मुद्दा उछालकर इसमें दरार डालने का एक बेहूदा प्रयास किया था, लेकिन हरियाणा प्रदेश के लोगों ने उनको सिरे से नकारते हुए भाजपा व जजपा नेताओं का घेराव करके उनको करारा जवाब देकर हरियाणा-पंजाब के भाईचारे की मिसाल देने का काम किया है।

    उन्होंने कहा कि हरियाणा, पंजाब को अपना बड़ा भाई मानता है, लेकिन अगर हम इस मुद्दे का इतिहास देखें तो पता चलता है कि किस प्रकार यूपीए तथा एनडीए में शामिल रहे हरियाणा व पंजाब के सभी राजनितिक दल एसवाईएल पर अपनी राजनितिक रोटियां सेंकते हुए हरियाणा-पंजाब के भाईचारे में दरार पैदा करते रहे हैं। जब भी हरियाणा और पंजाब में चुनाव होते हैं तो सालभर पहले हरियाणा व पंजाब के नेता दोनों राज्यों के लोगों को बेवकूफ बनाते रहे हैं। चुनाव जीतने के बाद जब कुर्सी पर बैठ जाते हैं तो सब इस मुद्दे को भूल जाते हैं।