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Saturday, February 7, 2026
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    कैथल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का हुआ भारी विरोध

    BJP state president's strong opposition in Kaithal

    वाल्मिकी समाज के कार्यक्रम में हुए थे शामिल

    कैथल (सच कहूँ न्यूज)। तीन कृषि कानूनों के चलते किसानों द्वारा भाजपा और जजपा नेताओं का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी क्रम में रविवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ को कैथल में भारी विरोध झेलना पड़ा। वे वाल्मीकि धर्मशाला में आयोजित एक समारोह में पहुंचे थे।

    जानकारी के अनुसार हरियाणा वाल्मीकि महापंचायत की ओर से सिरटा रोड स्थित वाल्मीकि धर्मशाला में डा. भीमराव आंबेडकर जयंती को लेकर समारोह का आयोजन किया गया था। इसमें भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़, राज्यमंत्री कमलेश ढांडा, सांसद नायब सिंह सैनी और विधायक लीला राम सहित जिला स्तर के सभी भाजपा नेता पहुंचे थे। कार्यक्रम की सूचना प्रदर्शनकारी किसानों को भी पहले ही मिल गई थी। प्रदर्शनकारी कार्यक्रम से दो घंटे पहले ही वहां पहुंच गए। वे दो गुटों में बंटे हुए थे और खनौरी रोड को दो जगहों से घेर लिया। वहीं सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने सिरटा रोड को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया।

    एसपी लोकेंद्र सहित सभी डीएसपी और जिले भर से पुलिस फोर्स को यहां तैनात किया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड और रस्सी लगाकर सिरटा रोड पर ही रोक लिया। एक बार तो प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर जाम लगाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया। पुलिस कर्मी प्रदर्शनकारियों के सामने खड़े रहे। करीब साढ़े 11 बजे राज्यमंत्री की गाड़ी अपने काफिले के साथ पहुंची, जिसे किसानों ने काले झंडे दिखाए और नारेबाजी की। हालांकि उस गाड़ी में राज्यमंत्री नहीं थी। करीब 20 मिनट बाद दोबारा से गाड़ियों का काफिला आया। उस काफिले में प्रदेशाध्यक्ष और राज्यमंत्री कमलेश ढांडा सहित सभी भाजपा नेता कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे।

    आंदोलन संदेशे पर नहीं अंदेशे पर चल रहा : धनखड

    भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा कि हरियाणा के किसानों को वे सभी सुविधाएं दी जा रही हैं, जो दूसरे राज्यों में नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों का आंदोलन संदेशे पर नहीं, बल्कि अंदेशे पर चल रहा है। भविष्य का भय दिखाकर आंदोलन चलाना ठीक नहीं है। वे सिरटा रोड स्थित वाल्मीकि धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों में कोई कमी नहीं है। किसानों की तरफ से जो सुधार बताए गए थे, उन्हें भी स्वीकार कर लिया गया है। जिस राज्य में किसानों को नुकसान हो रहा हो, वहां से आंदोलन शुरू करना चाहिए।

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