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    जानें, कैसे ईडी ने अनिल देशमुख के बेटे सलिल पर कसा शिकंजा

    Anil-Deshmukh SACHKAHOON

    मुम्बई (एजेंसी)। मनी लॉन्ड्रिंग केस में अनिल देशमुख की मुश्किले बढ़ती जा रही है। ईडी ने इस मामले में देशमुख के सुपुत्र सलिल देशमुख द्वारा खरीदे गए 15 प्लॉटों की जांच शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईडी के पास मौजूद दस्तावेजों से पता चलता है कि ये प्लॉट प्रीमियर पोर्ट लिंक्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर खरीदे गए थे, जिसमें सलिल देशमुख की हिस्सेदारी थी। आपको बता दें कि लगभग 300 करोड़ रुपये मूल्य की 8.3 एकड़ जमीन एनएच 348 पलासपे फाटा से जेएनपीटी से थोड़ी दूरी पर स्थित है।

    ईडी की जांच में खुलासा

    ईडी को जांच में पता चला है कि लीज के कुछ ही महीनों बाद पुणे डिस्ट्रिक्‍ट सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक की ओर से जारंदेश्‍वर एसएसके को 100 करोड़ का लोन दिया गया। अजित पवार तब इसी बैंक के डायरेक्‍टर्स में शामिल थे। अगले कुछ साल में भी अन्‍य बैंकों से 650 करोड़ रुपये का लोन पास किया गया।

    क्या है मामला

    जारंदेश्‍वर एसएसके को गुरु कमोडिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने खरीदा था। इसके बाद जारंदेश्‍वर एसएसके का जारंदेश्‍वर शुगर मिल प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर लीज हुआ। ईडी के अनुसार मिल को खरीदने के लिए इस्‍तेमाल किए गए फंड का एक हिस्‍सा स्‍पार्कलिंग सॉयल प्राइवेट लिमिटेड से प्राप्‍त हुआ था। यह कंपनी अजित पवार और उनकी पत्‍नी से जुड़ी है। ईडी का कहना है कि जारंदेश्‍वर शुगर मिल लिमिटेड और गुरु कमोडिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड जारंदेश्‍वर एसएसके के सिर्फ छद्म रूप से मालिक थे, जबकि असल नियंत्रण स्‍पार्कलिंग सॉयल प्राइवेट लिमिटेड के हाथ में था।

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