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    जब गहरे कुएं में गिरा तेंदुआ, जानें, फिर क्या हुआ

    leopard fell in the deep well sachkahoon

    पन्ना (एजेंसी)। मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व से लगे सुप्रसिद्ध मझगंवा हीरा खनन परियोजना क्षेत्र में स्थित बिना मुंडेर वाले सूखे गहरे कुएं में एक तेंदुआ गिर गया, जिसे 24 घंटे से भी अधिक समय गुजरने के बाद आज सुरक्षित निकाल लिया गया। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार बुधवार व गुरुवार की दरमियानी रात्रि पन्ना टाइगर रिजर्व के जंगल से निकलकर तेंदुआ हीरा खनन परियोजना क्षेत्र में पहुंच गया था। रात के अंधेरे में यह तेंदुआ हीरा खदान के निकट स्थित एक पुराने सूखे कुएं में गिर गया। कुआं में तेंदुआ के गिरने की सूचना कल जैसे ही पार्क प्रबंधन को मिली आनन-फानन रेस्क्यू टीम को मौके पर रवाना किया गया।

    पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉक्टर संजीव कुमार गुप्ता के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम ने गहरे कुआं से तेंदुआ को सुरक्षित बाहर निकालने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन दिनभर चले अथक प्रयासों के बावजूद सफलता नहीं मिली। इस चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा और उप संचालक जरांडे ईश्वर राम हरि भी मौके पर मौजूद रहे। मोटी रस्सियों के सहारे कुआं में चारपाई भी डाली गई, लेकिन यह युक्ति भी काम नहीं आई। तेंदुआ कुआं की तलहटी में काफी देर चहल-कदमी करता और फिर बैठ जाता था। जिससे यह तो साफ नजर आ रहा था कि वह जख्मी नहीं हुआ। आसपास लोगों की मौजूदगी से वह असहज होकर नाराजगी जरूर प्रकट कर रहा था। जब पूरे दिन चले प्रयासों से तेंदुए को बाहर निकालने में सफलता नहीं मिली तो पार्क प्रबंधन ने निहायत देशी और प्राकृतिक तरीका उपयोग किया और यह युक्ति काम आ गयी।

    कैसे निकला कुएं से तेंदुआ

    क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि देर शाम तक जब सारे प्रयास विफल हो गए तो हमने बिल्कुल देसी और प्राकृतिक तरीका अपनाया। कुआं की गहराई के नाप का एक यूकेलिप्टस का पेड़ शाम के समय कुआं के भीतर डालकर मौके से सभी को हटा दिया गया। पूरी रात तेंदुआ कुआं के भीतर ही रहा और जब उसे यह अहसास हुआ कि आस-पास कोई नहीं है तो वह शुक्रवार सुबह लगभग 5:30 बजे बड़े आराम से पेड़ के सहारे चढ़कर कुएं के बाहर आ गया। शर्मा ने बताया कि तेंदुआ सहजता के साथ वहां से जंगल की तरफ निकल गया है। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र के आसपास बिना मुंडेर वाला कुआं नहीं होना चाहिए, क्योंकि ऐसे असुरक्षित कुंओं में वन्य प्राणियों के गिरने की संभावना बनी रहती है।

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