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    जेएमडी बिल्डर ने 900 यूनिट होल्डर्स से ठगी कर किए करोड़ों के वारे-न्यारे

    Fraud

    फ्लोर प्लान बदलकर की गई धोखाधड़ी

    • बिल्डर-अधिकारियों पर लगे मिलीभगत आरोप
    • एमसीजी के संयुक्त आयुक्त व एसटीपी अदालत में तलब

    सच कहूँ/संजय मेहरा
    गुरुग्राम। प्रॉपर्टी खरीदारों के साथ प्रॉपर्टी के नंबर बदलकर धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। बिल्डर ने ऐसा करके करोड़ों के वारे-न्यारे किये हैं। अधिकारियों द्वारा की गई जांच में धोखाधड़ी साबित हो गई, लेकिन बिल्डर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब एसीजेएम अदालत द्वारा इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए नगर निगम गुरुग्राम के संयुक्त आयुक्त सुमित कुमार, जोनल टैक्सेशन आॅफिसर समीर श्रीवास्तव और वरिष्ठ नगर योजनाकार (एसटीपी) संजीव कुमार मान को 29 सितम्बर 2021 को तलब किया है।

    जानकारी के अनुसार जेएमडी लिमिटेड कंपनी की ओर से सोहना रोड पर जेएमडी मेगापोलिस नाम से एक व्यवसायिक बिल्डिंग का निर्माण किया गया। इसके सर्टिफिकेट के अनुसार इस बिल्डिंग में तीन बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर पर स्टिल्स पार्किंग एवं एक से 13वीं मंजिल तक आॅफिस यूनिट बनाई गई हैं। इस प्रोजेक्ट में एक यूनिट की खरीदार 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला दर्शन गोयल निवासी सुशांत लोक फेज-3 ने शिकायत देकर कहा कि उसने अपनी जिंदगी की पूरी जमा पूंजी लगाकर जेएमडी मेगापोलिस में 12वीं मंजिल पर 1474 स्क्वेयर फिट यूनिट नंबर-1214 खरीदी थी। पीड़िता का आरोप है कि बिल्डर ने आर्किटेक्ट और संबंधित अधिकारियों से मिलीभगत करके फर्जी कागजात तैयार कराए। आॅक्यूपेशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद सभी फ्लोर के नंबर बदल दिए गए। ये नंबर अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान से मेल नहीं खाते। उनकी जो प्रॉपर्टी 12वीं मंजिल पर थी, उसे बिल्डर ने गैर कानूनी रूप से बदलाव करके 13वीं मंजिल पर दे दिया। ऐसा करके बिल्डर ने न केवल उसे ठगा, बल्कि सभी 900 यूनिट होल्डर्स के साथ ठगी की है।

    अधिकारियों ने जांच की पर कार्रवाई नहीं

    जब यह मामला तत्कालीन एसडीएम संजीव कुमार (वर्तमान में नगर निगम के संयुक्त आयुक्त) के संज्ञान में लाया गया तो उन्होंने इसे बहुत गंभीरता से लिया। तहसीलदार से मौका मुआयना करके रिपोर्ट मांगी। रिपोर्ट में भी पाया गया की ओसी मिलने के बाद बिल्डर ने फ्लोर प्लान चेंज कर दिए हैं। संजीव कुमार ने इस रिपोर्ट को गहनता से जांच के लिए डीटीपीसी चंडीगढ़ भेजा। उस जांच में भी यही सामने आया कि 11 दिसम्बर 2018 को एसटीपी गुरुग्राम ने जो जांच रिपोर्ट भेजी है, वह सही है। साथ ही यह भी सामने आया कि यूनिट्स के नंबर बदलने के अलावा ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण और लाइंसेंस की शर्तों का भी घोर उल्लंघन किया गया है। इसके अलावा जेएमडी बिल्डर ने सारी पहली मंजिल का व्यवसायिक करके करोड़ों के वारे-न्यारे किए हैं। यह भ्रष्टाचार निरोधक एक्ट की धारा 13 (1) के अनुसार भ्रष्टाचार है। इस तरह मिलीभगत से बिल्डर आम जनता से ठगी कर रहे हैं।

    एसडीएम रहते संयुक्त आयुक्त ने की थी जांच

    शिकायतकर्ता के एडवोकेट यतिश कुमार गोयल का कहना है कि नगर निगम के संयुक्त आयुक्त संजीव कुमार एसडीएम रहते हुए इस मामले की जांच कर चुके हैं। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे साबित होता है कि जेएमडी बिल्डर एवं नगर निगम के अधिकारियों की पूरे मामले में मिलीभगत है। इस प्रोजेक्ट में 900 यूनिट होल्डर्स के साथ ठगी की गई है। इससे साफ है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। इस बावत एक क्रिमिनल केस सभी दस्तावेजों के साथ कोर्ट में दायर किया गया है। कोर्ट ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने नगर निगम के संयुक्त आयुक्त जोन-4 संजीव कुमार, जोनल टैक्सेशन आफिसर समीर श्रीवास्तव और एसटीपी संजीव मान को संबंधित मामले में सभी दस्तावेजों के साथ तलब किया है।

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