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Friday, February 6, 2026
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    पंजाब मंत्रिमंडल चयन पार्टी को एकजुट रखने की कवायद

    Punjab Cabinet

    अमरिन्दर सिंह को मुख्यमंत्री के पद से हटाने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने जितना सशक्त और एकाएक मजबूत फैसला लिया था, कैबिनेट गठन करते वक्त भी धैर्य व समझदारी से काम लिया गया है। मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप देने के लिए हाईकमान ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को तीन बार दिल्ली बुलाया, जिसके बाद साफ जाहिर हो रहा था कि हाईकमान जल्दबाजी में कोई कदम उठाने की बजाय पार्टी के अंदरूनी हालातों को दुरूस्त रखने के साथ-साथ आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर हर चीज पर विचार करना चाहती है। हाईकमान ने इस तथ्य की ओर पूरा गौर किया कि कहीं कैप्टन अमरिन्दर सिंह के बगावती सुरों से पार्टी को नुक्सान न झेलना पड़े। इसलिए अमरिन्दर सिंह समर्थक कुछ बेदाग मंत्रियों को दोबारा कैबिनेट में शामिल करने की रणनीति बनाई गई। यहां कांगे्रस ने भाजपा के गुजरात फॉर्मूले से अपने आप को अलग रखते हुए सभी धड़ों की ओर ध्यान दिया है।

    गुजरात में 22 के 22 पुराने मंत्रियों को हटाकर नई टीम लगाई गई है लेकिन कांग्रेस ने पंजाब में नए और पुराने मंत्रियों को लगाने में काफी मंथन किया है। बेशक कांग्रेस हाईकमान ने विधानसभा क्षेत्रों के अन्य समीकरणों को भी ध्यान में रखा है, लेकिन ज्यादातर जोर कैप्टन बनाम नवजोत सिद्धू की लड़ाई पर ही केन्द्रित रहा है। कैप्टन के खिलाफ बगावत करने वाले प्रगट सिंह, संगत सिंह गिलजिंया, अमरिन्दर राजा वडिंग को मंत्री बनाया गया है। इसके साथ ही कैप्टन के कट्टर समर्थकों को भी सख्त संदेश दिया है। फिर भी हर चीज को कैप्टन बनाम सिद्धू की नजर से नहीं देखा गया। कुछ उन विधायकों को भी मंत्री बनाया गया है, जो दोनों धड़ों से खुद को बचाकर चलते रहे। इसके साथ ही भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाकर मंत्रियों की सूची पर मैरिट की मोहर लगाने की कोशिश की गई है।

    कुल मिलाकर पार्टी की नई कैबिनेट का गठन करके यह दिखाने की कोशिश की गई है कि कैप्टन की रवानगी के बाद पार्टी में किसी तरह का विवाद नहीं है, क्योंकि कैप्टन समर्थक भी कैबिनेट में हैं और कैप्टन विरोधी भी। हटाए गए दो मंत्रियों की ओर से नाराजगी जाहिर की गई है, लेकिन उनके बोलने का लहजा अभी शिकायती ही है, बागी नहीं। यह भी साफ संकेत है कि कोई धड़ा बेशक कैप्टन विरोधी है, लेकिन उसको फ्री हैंड नहीं रखा गया है, साथ ही हाईकमान की निगरानी में रखा गया, जो सभी धड़ों के तालमेल को जरूरी मान रही है। अब यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि नई टीम अपने अल्प काल में किस तरह तालमेल बनाकर बेहतरीन काम करके जनता को रिझाती है।

     

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