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    सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

    Right to Information Act sachkahoon

    झूठे वायदों पर संज्ञान लेने का चुनाव आयोग के पास अधिकार नहीं

    • नेताओं को आसान रास्ते से निकलने की मिल रही खुली छूट

    • जनता को लॉलीपाप थमा सत्ता की मलाई खा रहे नेता

    सच कहूँ/संजय मेहरा, गुरुग्राम। चुनावों में जनता के बीच वोट हथियाने के लिए तमाम तरह के झूठे वायदे करने वाले नेताओं पर शिकंजा करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है। यह खुलासा चुव आयोग में लगाई गई एक आरटीआई में खुलासा हुआ है। इस आरटीआई में चुनाव आयोग ने जवाब देते हुए खुद माना है कि झूठे वायदों और ऐसे वायदे करने वाले नेताओं पर आयोग कुछ नहीं कर सकता।

    आरटीआई के जवाब में चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपने चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वायदों के संबंध में चुनाव आयोग के पास कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं। परंतु उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए आदर्श आचार संहिता में निर्वाचक घोषणा पत्र पर दिशा-निर्देश को शामिल किया है। चुनाव आयोग ही इस मामले में पीछे हट रहा है तो फिर आखिरी उम्मीद सुप्रीम कोर्ट ही बची है।

    आरटीआई कार्यकर्ता संदीप कुमार गोयल द्वारा सुप्रीमकोर्ट में बात पहुंचा दी गई है। चीफ जस्टिस को संबोधित पत्र में कहा गया है कि चुनाव आयोग नेताओं के झूठे वायदों को लेकर कुछ नहीं कर सकता। इसलिए अदालत इस अपील पर सुनवाई करके दिशा-निर्देश जारी करें। संदीप गोयल ने कहा कि चुनावों में जनता के बीच नेता और राजनीतिक दल इतने वायदे करके चले जाते हैं। जनता उन पर विश्वास करके उन्हें वोट देती है। चुनाव जीतने के बाद उन वायदों पर से धूल तक नहीं झाड़ी जाती और अपने विकास की उम्मीद में वोट देने वाली जनता नेताओं को ताकती रह जाती है। नेताओं के झूठे वायदों पर लगाम लगनी चाहिए। कोई ऐसी अथॉरिटी जरूर बने, जो कि जनता के बीच नेताओं द्वारा किए गए वायदों पर समय-समय पर संज्ञान लेकर उन्हें पूरा करवाने में सेतू का काम करे। क्योंकि अगर चुनावों में नेताओं को झूठ बोलने, झूठे वायदे करने की छूट मिलती रही तो राजनीतिक दलों और नेताओं को और बल मिलेगा।

    इन सवालों के पूछे थे जवाब

    • सामाजिक कार्यकर्ता संदीप कुमार गोयल ने चुनाव आयोग से आरटीआई में पूछा था कि क्या कोई भी राजनीतिक दल सरकार के पैसे से वोट खरीद सकता है?
    • क्या कोई भी राजनीतिक दल चुनाव से पहले या चुनाव के दौरान सरकारी पैसे से मुफ्त बिजली पानी या किसी अन्य वस्तु का मतदाता को मुफ्त देने का ऐलान कर सकता है?
    • सरकारी पैसे से कर्ज माफी का ऐलान कर सकता है?
    • चुनावों में नेताओं द्वारा बहुत कुछ ऐसा कहा जा रहा है, जो कि सही नहीं ठहराया जा सकता?
    • क्या यह आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है।
    • अगर कोई नेता या राजनीतिक दल झूठे वायदे जनता से करता है तो चुनाव आयोग की ओर से ऐसा करने वालों पर क्या कार्यवाही हो सकती है?
    • साथ ही एक जनवरी 2006 से 31 मार्च 2021 तक कितने नेताओं पर कार्रवाई आयोग नहीं की, इसका ब्यौरा दिया जाए।

    चुनाव आयोग को मिलने चाहिए अधिकार : अशोक बुवानीवाला

    हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता अशोक बुवानीवाला ने इस आरटीआई पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि चुनाव आयोग को ऐसे अधिकार मिलने चाहिए, जिससे कि वह नेताओं द्वारा किये जाने वाले वायदों पर संज्ञान ले सके। लोकतंत्र के लिए यह सही होगा। क्योंकि अक्सर जनता नेताओं के वायदों में आकर वोट तो दे देती है, बाद में नेताओं द्वारा काम करने तो दूर, वे जनता से दूर हो जाते हैं।

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