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    खून का कतरा-कतरा ‘इंसानियत’ को समर्पित

    मानवता। डेंगू-मलेरियां से पीड़ित मरीजों को दिन-रात खून व प्लेट्लेटस डोनेट करने में जुटे डेरा श्रद्धालु

    करनाल (सच कहूँ/विजय शर्मा)। इन्हें नहीं मालूम की जो ये खून दान कर रहे हैं, आने वाले कल में वह किसकी रगों में बहेगा। अपना होगा या बेगाना, दोस्त होगा या दुश्मन, या कोई परदेशी। इन्हें इस बात से कोई लेना देना नहीं। दिल में उमंग और चेहरे के भाव बस ये हीं बयां करते हैं कि हमारे खून से अगर किसी की जिन्दगी बचती है तो हम खून का कतरा-कतरा भी दान करते रहेंगे। ऐसा ही जज्बा भरा है डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों में, जो इस समय प्रदेश में फैल रहे डेंगू-मलेरियां से पीड़ित मरीजों को दिन रात खून व प्लेट्लेटस डोनेट कर उनकी जिन्दगी बचा रहे हैं।

    रक्तदान को लेकर जिला करनाल ब्लॉक के डेरा श्रद्धालु व शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग के सेवादारों का जज्बा देखकर समाज का हर वर्ग उन्हें सैल्यूट कर रहा है। बता दें कि गत दिनों पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षा पर चलते हुए डेरा श्रद्धालु नवीन इन्सां व गुलाब इन्सां ब्लॉक असंध ने गर्भवती महिला को कल्पना चावला हॉस्टिपल करनाल में प्लेट्लेटस दान कर उसकी मद्द की। वहीं ब्लॉक कम्बोपुरा से सुरेन्द्र इन्सां ने कैथल निवासी राजवीर को कल्पना चावला हॉस्टिपल में एक यूनिट खून दिया। इसके साथ ही राजेश इन्सां ने डेंगू पीड़ित मरीज को खूनदान कर मानवता का परिचय दिया।

    डेंगू-मलेरिया के बढ़ते केसों के कारण रक्तदान व प्लेट्लेटस की मांग भी बढ़ गई है। ऐसे मुश्किल समय पर पीड़ित मरीजों को डेरा श्रद्धालु बड़ी संख्या में रक्तदान कर रहे। मैंने भी गभर्वती महिला को जिसके प्लेट्लेटस सिर्फ 6 हजार रह गए थे उसे प्लेट्लेटस डोनेट कर इंसानियत का फर्ज अदा किया है। मुझे गर्व है अपने सतगुरु पर जिन्होंने मुझे ऐसी शिक्षा दी कि मंै आज किसी के काम आ सका।
    -नवीन इन्सां, ब्लॉक असंध, करनाल

    रक्तदान की जब भी किसी को जरूरत होती है तो हर किसी की जुबां पर डेरा अनुयायियों का ही नाम आता है। थैलीसीमिया, डेंगू से पीड़ित मरीज की बात हो या सरहद पर तैनात जवान की, जब रक्तदान की बारी आती है तो डेरा अनुयायी हमेशा तैयार रहते हैं। पूज्य गुरु जी ने ही हमें सिखाया है कि दूसरों के लिए जीना ही इंसानियत है।
    सुरेन्द्र इन्सां, ब्लॉक कम्बोपुरा।

    मैंने अकसर देखा हैं कि रक्त न मिलने के कारण कई मरीज दम तोड़ जाती है। लेकिन पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से मुझे रक्तदान की जब से प्रेरणा मिली है। मैं रक्तदान करता आ रहा हूँ, और मैं ही नहीं पूज्य गुरु जी द्वारा रक्तदान के प्रति लाई गई जागरूकता के कारण करोड़ों लोग रक्तदान जैसे पुनीत कार्य में लगे हुए हैं।
    -राजेश इन्सां, करनाल।

    हमारा रक्त इंसानियत के काम आए, इससे बड़ा कोई दान नहीं हो सकता। पूज्य गुरु जी द्वारा दी गई पावन शिक्षा पर चलते हुए जब भी किसी जरूरतमंद की सेवा में सहयोगी बनता हूँ तो एक असीम आनंद मिलता है। रक्तदान करके तो दिल गद्गद् हो जाता है। मेरी एक ही अभिलाषा है कि मैं जरूरतमंदों के काम आता रहूं।
    – गुलाब इन्सां, ब्लॉक असंध।

     

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