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    सीबीआई व ईडी प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाने पर मोदी सरकार के फैसले का क्यों हो रहा है विवाद?

    नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। अभी हाल ही में मोदी सरकार ने सीबीआई और ईडी प्रमुखों का कार्यकाय 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया है। विपक्ष ने केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेशों पर आपत्ति जताई है। पार्टी ने संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में राज्यसभा में सांविधिक संकल्पों का एक नोटिस भी जारी कर दिया है।

    क्या है अध्यादेश में

    अध्यादेश में दिल्ली पुलिस विशेष प्रतिष्ठान अधिनियम में संशोधन किया गया है जो सीबीआई और केंद्रीय सतर्कता आयोग के लिए मूल कानून है। इसी के तहत ईडी निदेशक की नियुक्ति होती है। अध्यादेश में यह प्रावधान किया गया है कि ईडी या सीबीआई प्रमुख का दो साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद केंद्र सरकार उनका कार्यकाल एक-एक साल कर लगातार तीन साल के लिए बढ़ा सकती है। रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा लाए गए दो अध्यादेशों पर हस्ताक्षर कर सरकार के अध्यादेश को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। तृणमूल कांग्रेस ने कार्यकाल में विस्तार करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेश लाने पर आपत्ति जताते हुए सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाया है।

    सीबीआई निदेशक की नियुक्ति का निर्णय पीएम, विपक्ष के नेता और देश के मुख्य न्यायाधीश मिलकर लेते हैं

    आपको बता दें कि ईडी निदेशक की नियुक्ति के लिए केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी), सतर्कता आयुक्तों के अलावा राजस्व विभाग, कार्मिक विभाग और गृह मंत्रालय के सचिवों की एक समिति होती है। वहीं सीबीआई निदेशक की नियुक्ति का निर्णय प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और देश के मुख्य न्यायाधीश मिलकर लेते हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को लगाई फटकार, कहा-बताइए, कितनों को दिलवाई सजा

    अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को लगाई थी फटकार

    सीबीआई के कामकाज से नाराज उच्चतम न्यायालय ने 4 सितंबर 2021 को सीबीआई को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने एजेंसी से सक्सेस रेट बताने को कहा था। सीबीआई द्वारा मुकदमा चलाए जा रहे केसों में देरी का हवाला देते हुए कोर्ट ने अदालती मामलों में एजेंसी की सफलता दर पर डेटा मांगा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट सीबीआई का प्रदर्शन का मूल्यांकन कर सकता है। आपको बता दें कि एक केस में सीबीआई द्वारा 542 दिनों की देरी के बाद अपील दायर किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की और उसने जांच एजेंसी के कामकाज और उसके परफॉर्मेन्स का विश्लेषण करने का फैसला किया है।

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