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    भारत विरोधी मानसिकता वालों को भी मिले जवाब

    भारत विरोधी मानसिकता रखने वालीं डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद इल्हान उमर ने अपने भारत विरोधी तेवर जारी रखते हुए अमेरिकी संसद में एक प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव में धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघन के लिए भारत को विशेष रूप से चिंता वाला देश घोषित करने की मांग की गई है। इल्हान उमर की ओर से पेश किये गये इस प्रस्ताव को अमेरिकी सांसद रशीदा तालिब और जुआन वर्गास का समर्थन प्राप्त है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने हालांकि इस प्रस्ताव को आवश्यक कार्रवाई के लिए सदन की विदेश मामलों की समिति के पास भेज दिया है लेकिन इस प्रस्ताव के पारित होने की कोई उम्मीद नहीं है क्योंकि अमेरिकी सरकार इल्हान उमर के भारत के प्रति प्रतिशोधी रुख से परिचित है।

    अमेरिकी प्रशासन भलीभांति जानता है कि जब-जब भारत की बात आती है तो इल्हान उमर खुलकर पाकिस्तान के समर्थन में खड़ी होती हैं। यही नहीं, भारत से जुड़ी अमेरिकी कांग्रेस की कई सुनवाइयों में भी इल्हान उमर ने लगातार भारत विरोधी रुख दिखाया है। भारत की छवि खराब करने को सदा आतुर रहने वाली इल्हान उमर की ओर से जो प्रस्ताव अमेरिकी कांग्रेस में पेश किया गया है वह भारत में कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघन की निंदा करता है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि भारत में मुसलमानों, ईसाइयों, सिखों, दलितों, आदिवासियों और अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक अल्पसंख्यकों को लक्षित करके हमले किये जा रहे हैं। इस प्रस्ताव में भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ कथित खराब सलूक पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। इल्हान उमर की अपने देश के नेताओं से भले नहीं बनती हो लेकिन तुर्की के राष्ट्रपति रिसेप तैयब एर्दोगन से उनकी खूब बनती है।

    दोनों के दोस्ताना संबंध जगजाहिर हैं। यही नहीं इल्हान उमर हर वो प्रयास करती हैं ताकि बाइडन प्रशासन के साथ भारत के संबंध खराब हो जाएं। कश्मीर का मामला हो या फिर भारतीय मुसलमानों से जुड़ा मामला हो, इल्हान उमर भारत पर निशाना साधने से गुरेज नहीं करतीं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो इल्हान उमर के खिलाफ काफी आक्रामक रहते थे। उन्होंने 2019 में कहा था कि इल्हान उमर और उनके जैसे लोगों को वापस वहीं चले जाना चाहिए जहां से वह आये थे। बहरहाल, इल्हान उमर चाहे पीओके की यात्रा करें, चाहे पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करें या फिर अमेरिकी संसद में कितने ही भारत विरोधी प्रस्ताव ले आयें, यह सब कवायदें उन्हें मीडिया की सुर्खियों में तो बनाये रख सकती हैं लेकिन इसका कोई असर भारत पर नहीं पड़ेगा।

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