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    बर्मिंघम 2022 : सौरव घोषाल ने जीता ऐतिहासिक स्क्वाश पदक

    बर्मिंघम (एजेंसी)। भारत के स्क्वाश खिलाड़ी सौरव घोषाल ने बर्मिंघम 2022 में इंग्लैंड के जेम्स विलस्ट्रोप को हराकर भारत को राष्ट्रमंडल खेलों का पहला एकल स्क्वाश पदक दिलाया। घोषाल ने कांस्य पदक मैच में विलस्ट्रोप को 11-6, 11-1, 11-4 से मात दी। इससे पहले घोषाल का सामना सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के पॉल कोल से हुआ था जहां उन्हें हार मिली थी। यह बर्मिंघम 2022 में भारत का पहला स्क्वाश पदक भी है। भारत अब तक इस आयोजन में पांच स्वर्ण, पांच रजत और पांच कांस्य सहित 15 पदक जीत चुका है।

    भारोत्तोलन : छठे स्थान पर रहीं पूर्णिमा

    भारतीय महिला भारोत्तोलक पूर्णिमा पांडे राष्ट्रमंडल खेल 2022 के 87+ किग्रा फाइनल में छठे स्थान पर रहीं, जबकि इंग्लैंड की एमिली कैंपबेल ने खेल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। पूर्णिमा ने स्नैच में 103 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 125 किग्रा के सफल प्रयासों के साथ कुल 228 किग्रा की लिफ्ट दर्ज की। उनके छह प्रयासों में से केवल दो सफल रहे जिसकी वजह से वह छठे स्थान पर आ गयीं। दूसरी ओर, कैंपबेल ने स्नैच में 124 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 162 किग्रा के सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के साथ पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने कुल लिफ्ट (286 किग्रा) का नया राष्ट्रमंडल खेल रिकॉर्ड भी बनाया। समोआ की फीगैगा स्टोअर्स ने प्रतियोगिता में रजत पदक प्राप्त किया, जबकि आॅस्ट्रेलिया की करिजमा टैरेंट को कांस्य हासिल हुआ।

    हम्पी, वैशाली ने महिला वर्ग में भारत को जॉर्जिया पर जीत दिलाई

    कोनेरू हम्पी ने महिला सर्किट की शीर्ष खिलाड़ियों में से एक नाना डेजग्निडेज पर बड़ी जीत हासिल की। उनके इस चमकदार प्रदर्शन की बदौलत भारत-ए ने तमिलनाडु के मामल्लापुरम में जारी 44वें शतरंज ओलंपियाड में बुधवार को महिला वर्ग के छठे राउंड के मैच में तीसरी वरीयता प्राप्त जॉर्जिया को 3-1 से हरा दिया। हम्पी के अलावा, आर. वैशाली ने उम्दा प्रदर्शन किया। वैशाली ने एक उच्च श्रेणी की खिलाड़ी लैला जवाखिस्विली को हराया, जबकि तानिया सचदेव और हरिका द्रोणावल्ली ने ड्रॉ हासिल किया। इन सबकी बदौलत भारत ने यह मैच अपने नाम किया। मैच के मध्य भाग तक हम्पी पूर्ण नियंत्रण में थीं। उनके लगभग सभी मोहरे सुरक्षित स्थिति में थे और साथ ही साथ विपक्षी खिलाड़ी के मोहरों पर हमला करते हुए भी दिखाई दे रहे थे।

    सावधानी से खेलते हुए हम्पी ने अपनी विपक्षी खिलाड़ी को समय-समय पर मोहरों के आदान-प्रदान को मजबूर किया और 42वें टर्न पर जब भारतीय बिशप और क्वीन ने एक मोहरा जीतने के लिए कदम बढ़ाया तो डेजग्निडेज ने हथियार डाल दिया। मैच के बाद हम्पी ने कहा, ‘मैं टूर्नामेंट के इस चरण में पदक के बारे में नहीं सोच रही हूं क्योंकि हमें अभी भी यूक्रेन जैसी कई और कठिन टीमों के खिलाफ खेलना है। हमारी टीम भावना ऊंची है और जब भी जीत की जरूरत होती है, हमेशा टीम का कोई एक खिलाड़ी चमकता है। ह्वहम्पी ने बाद में स्वीकार किया कि नाना द्वारा बेनोनी डिफेंस के चुनाव करने से वह पूरी तरह से हैरान थीं और उन्होंने शुरूआत में कुछ संदिग्ध चालें चलीं। नाना को एक एक लिहाज से सुखद स्थिति मिल गई थी लेकिन जल्द ही हम्पी ने कुछ सटीक चालों की मदद से स्थिति बदल दी।

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