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    महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के उपचार में बाधा बनते हैं परिजन

    Breast Cancer

    साल 2020 में 39.4 प्रतिशत थे ब्रेस्ट कैंसर के केस

    • एक महिला ने सर्जरी के बाद स्वस्थ बच्चे को भी दिया जन्म
    • उपचार करने चिकित्सकों ने सांझा किए अपने अनुभव

    गुरुग्राम(संजय कुमार मेहरा)। ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं होता। साल 2020 में महिलाओं में कुल कैंसर के केस में ब्रेस्ट कैंसर की हिस्सेदारी 39.4 प्रतिशत थी। चिकित्सा जगत में कैंसर के खात्मे को नई-नई तकनीक इजाद हो रही हैं। ऐसे में कैंसर पर विजय भी मिल रही है। हाल ही में तीन महिलाओं ने बे्रस्ट कैंसर को हराकर जिंदगी की जंग जीती है। इनमें से एक महिला ने तो सर्जरी के बाद स्वस्थ बच्चे को जन्म भी दिया।

    दिल्ली की रहने वाली 70 वर्षीय महिला वर्ष 2004 से ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही थी। उनकी ब्रेस्ट का बायां हिस्सा कैंसर के कारण नष्ट हो गया था। पूरे पेट में मेटास्टेसिस फैल गया था। यहां पारस अस्पताल के ऑन्कोलॉजिस्ट विभाग में उनकी जांच के बाद बायोप्सी, हार्मोनल थैरेपी और नई दवाओं से इलाज किया गया। इस तरह से उसने कैंसर को हराया। अब वह पूरी तरह से कैंसर मुक्त है।

    कोरोना संक्रमित होकर भी नहीं छोड़ा कैंसर का इलाज

    एक अन्य महिला अनुराधा (बदला हुआ नाम) ने मई 2020 में 47 साल की उम्र में अपनी ब्रेस्ट में गांठ महसूस की। अनुराधा ने जब यह महसूस किया तो नियमित जांच कराई। इस दौरान पता चला कि उनके स्तन में गांठ है। उनकी स्थिति और कई फैक्टर को समझने के बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने कीमोथैरेपी और टार्गेटेड थैरेपी सुझाई। उन्हें एक साल के लिए कीमोथैरेपी, सर्जरी और रेडियेशन थैरेपी, टारगेटेड थैरेपी करानी पड़ी। कैंसर का उपचार कराते-कराते कोरोना की पहली लहर के दौरान वह कोरोना पॉजिटिव हो गई। इन सबके बावजूद उन्होंने कैंसर के इलाज को जारी रखा। अनुराधा ने कुछ ही समय में ब्रेस्ट कैंसर और कोरोना दोनों पर जीत हासिल की।

    कैंसर की सर्जरी के बाद दिया स्वस्थ बच्चे को जन्म

    एक अन्य 35 वर्षीय महिमा (बदला हुआ नाम) को ट्रिपल नेगेटिव टाइप का ब्रेस्ट कैंसर था। महिमा का केस गंभीर था। इसलिए उन्हें कीमोथैरेपी, उसके बाद सर्जरी और रेडिएशन थैरेपी करानी पड़ी। सर्जरी के दौरान महिला के बाएं स्तन को पूरी तरह से हटाने की सलाह दी गई। कैंसर से पीडि़त होने के दौरान वह कभी भी गर्भधारण करने में सफल नहीं हो पाई। हालांकि उन्हें यह भी पता था कि बच्चे के जन्म के बाद स्तनपान नहीं कराया जा सकता है। फिर भी दंपति ने उम्मीद नहीं छोड़ी। सिजेरियन के जरिए महिला ने सफलतापूर्वक एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।

    ब्रेस्ट कैंसर को लेकर अफवाहें वे गलत धारणाएं: डा. रंगा राव

    पारस अस्पताल में कैंसर सेन्टर के चेयरमैन डॉ. रंगा राव ने ब्रेस्ट कैंसर योद्धाओं के जीवन पर बात करते हुए कहा कि एडवांस तकनीक और मेडिकल साइंस में जबरदस्त उन्नति से हम अब असंभव को सम्भव करने में सक्षम हुए हैं। हालांकि मरीजों का सही समर्थन ना मिलना अभी भी समस्या बना हुआ है। ब्रेस्ट कैंसर को लेकर समाज में कई अफवाह और गलत धारणा मौजूद हैं। इस वजह से परिवार के सदस्य इलाज कराने वाले मरीजों का समर्थन नहीं करते हैं। वे मैमोग्राफी और स्क्रीनिंग के नाम पर पीछे हट जाते हैं। भारत में ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे ज्यादा होता है।

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