हमसे जुड़े

Follow us

9.2 C
Chandigarh
Saturday, January 24, 2026
More
    Home राज्य हरियाणा महिलाओं ने के...

    महिलाओं ने केक काटकर, नाच-गाकर मनाया महिला दिवस

    महिलाओं ने एक-दूसरे को महिला दिवस की बधाई देकर लगाया गले

    • महिला दिवस, होली एक साथ आने पर खुशी व जोश हुआ दुुुगुना

    गुरुग्राम। (सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा) इस बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और होली का पर्व एक ही दिन आया तो महिलाओं की खुशी भी दुगुनी हो गई। दिन भर महिलाओं ने रंगों से सराबोर होकर होली खेली और नाच-गाकर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस भी मनाया। कहीं केक काटा गया तो कहीं मिठाइयां बांटी गई।

    यह भी पढ़ें:– सौरभ भारद्वाज और आतिशी मालेर्ना ने ली मंत्री पद की शपथ

    केक काटकर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की खुशी मनाते हुए सरोज (सरू), हरप्रीत, तनुजा, सोनिया, पूजा, ज्योति, संगीता, विद्या, काव्या, वैशाली, गीता आदि ने कहा कि हर क्षेत्र में महिलाओं को बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए। महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। ना ही किसी तरह का भेदभाव होना चाहिए। महिलाएं, बेटियां समाज का अहम हिस्सा हैं। खेल, सेना, पुलिस, अंतरिक्ष हर क्षेत्र में महिलाएं अपनी प्रतिभा से पहुंची हैं। समाज को अस्तित्व महिलाओं से है। इसलिए उन्हें किसी भी स्तर पर भुलाया नहीं जाना चाहिए। आधी आबादी को पूरे हक देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जाए, तभी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के मायने सार्थक होंगे।

    वर्ष 1911 में मनाया गया था पहला महिला दिवस

    अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरूआत 20वीं सदी में अमेरिकी समाजवादी और श्रमिक आंदोलनों से हुई थी। उस समय महिलाएं काम के घंटे कम करने, बेहतर वेतन और वोट देने के अधिकार के लिए लड़ रही थी। वर्ष 1911 में महिला दिवस का पहला उत्सव मनाया गया था। इस दौरान आॅस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में 10 लाख से भी अधिक लोगों ने महिलाओं के अधिकारों का समर्थन करने के लिए रैलियां तक निकाली थी। इसके बाद से महिलाओं के कार्य स्थलों पर समानता से लेकर हिंसा के खिलाफ मुद्दों पर भी बातें हुई। इस दिवस को मनाने के लिए किसी समूह, संस्था के पास स्वामित्व नहीं था। ऐसे में वर्ष 1977 में संयुक्त राष्ट्र से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को मान्यता मिली।

    इसलिए 8 मार्च को मनाया जाता है महिला दिवस

    आठ मार्च को इस दिवस के मनाने के पीछे उद्देश्य यह है कि वर्ष 1917 में रूसी महिलाओं ने रोटी और शांति की मांग के लिए विरोध प्रदर्शन किया था। इसके चलते तत्कालीन रूसी जार को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। जिस दिन रूसी महिलाओं ने इस प्रदर्शन की शुरूआत की थी, वह दिन रूसी कैलेंडर के हिसाब से 23 फरवरी (रविवार) था। यदि इस तारिख को ग्रेगॉरियन कैलेंडर के हिसाब से देखा जाए तो वह दिन आठ मार्च का था। तब से इसी दिन को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का नाम दिया गया।

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और TwitterInstagramLinkedIn , YouTube  पर फॉलो करें।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here