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Monday, February 2, 2026
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    अकाली-बसपा से नाराज राज्यपाल दफ्तर, कुलपति के बिल मौके सरकार के पक्ष में थी दोनों पार्टियां

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    अकाली दल के नेताओं से पूछा जा रहा ‘क्यों की गई सर्वसम्मति’
    • राज्यपाल कार्यालय भी ‘द् सिक्ख गुरुद्वारा संशोधन विधेयक 2023’ पर अधिक मदद करने को नहीं तैयार
    • अकाली दल के नेताओं से पूछा जा रहा ‘क्यों की गई सर्वसम्मति’

    चंडीगढ़ (सच कहूँ/अश्वनी चावला)। अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी से पंजाब राज्यपाल कार्यालय नाराज हो गया है, क्योंकि विधानसभा में जिस समय पंजाब के राज्यपाल से कुलपति के अधिकारी छीने जाने का बिल पेश किया जा रहा था, तो शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी के विधायकों द्वारा इस संशोधन बिल की विरोधता करने बजाय सरकार के पक्ष में भुगताना शुरु कर दिया गया। जिसे लेकर राज्यपाल के दफ्तर में जाने वाले अकाली दल के नेताओं को पूछा जा रहा है कि विधानसभा के सदन के अंदर पार्टी की ऐसी क्या मजबूरी थी कि राज्यपाल को कुलपति के पद से हटाने के बिल का विरोध करने की जगह पर सर्वसम्मति से पास करवा दिया गया। Chandigarh News

    पंजाब राजभवन के सूत्रों का कहना है कि इसी नाराजगी के चलते राज्यपाल कार्यालय मौजूदा गुरुद्वारा संशोधन बिल 2023 को लेकर कानून के अनुसार ही आगे की कार्रवाई करेगा और इस बिल को लेकर शिरोमणि अकाली दल की ज्यादा सुनवाई भी नहीं की जाएगी। पंजाब के राज्यपाल कार्यालय द्वारा विधानसभा के हर विवाद की जानकारी ली गई है, जिस
    कारण वह नाराज हो गए हैं।

    जानकारी अनुसार पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा राज्य के विश्वविद्यालय में कुलपति नियुक्त करने का अधिकार मुख्यमंत्री के पास नहीं होने का एतराज जताया गया था। पंजाब के कुछ विश्वविद्यालयों में उप कुलपति की नियुक्ति को लेकर राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित और मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच विवाद भी हुआ था। जिसके बाद भगवंत मान द्वारा यह फैसला कर लिया गया था कि राज्य के विश्वविद्यालय के उप कुलपति की नियुक्ति का अधिकार मुख्यमंत्री के पास होना चाहिए। Chandigarh News

    भगवंत मान के इस फैसले को देखते हुए उच्च शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस द्वारा विधानसभा में पंजाब यूनिवर्सिटी कानून संशोधन बिल 2023 को पेश किया गया था और लंबी बहस के बाद इस बिल को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया था। इस विधेयक के कानून बनने के बाद राज्यपाल की जगह पर मुख्यमंत्री के पास कुलपति का पद आ जाएगा। विधानसभा में इस बिल को पास करते समय शिरोमणि अकाली दल और बसपा के विधायकों द्वारा विरोध करने की बजाय इस बिल का समर्थन किया गया था।

    भारतीय जनता पार्टी विधानसभा के बाहर इस बिल का पुरजोर विरोध कर रही है, लेकिन सदन में हुई बहस के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस बिल का समर्थन किया गया है। इसका समर्थन करने के साथ ही सर्वसम्मति से बिल को पारित होने पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा भारी समर्थन दिया गया था। हालांकि सदन में 20 जून को भारतीय जनता पार्टी के दोनों विधायकों में से एक भी विधायक मौजूद नहीं था, लेकिन फिर भी विधानसभा की सदन की कार्यवाही को लेकर जो डिबेट जारी की गई है, उसके अनुसार भारतीय जनता पार्टी के विधायक सदन में मौजूद थे और उन्होंने बिल पर अपनी सहमति जताई थी।

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    बीजेपी द्वारा भी किया गया बिल का समर्थन! | Chandigarh News

    भारतीय जनता पार्टी विधानसभा के बाहर इस बिल का पुरजोर विरोध कर रही है, लेकिन सदन में हुई बहस के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस बिल का समर्थन किया गया है। इसका समर्थन करने के साथ ही सर्वसम्मति से बिल को पारित होने पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा भारी समर्थन दिया गया था। हालांकि सदन में 20 जून को भारतीय जनता पार्टी के दोनों विधायकों में से एक भी विधायक मौजूद नहीं था, लेकिन फिर भी विधानसभा की सदन की कार्यवाही को लेकर जो डिबेट जारी की गई है, उसके अनुसार भारतीय जनता पार्टी के विधायक सदन में मौजूद थे और उन्होंने बिल पर अपनी सहमति जताई थी।

    यह भी पढ़ें:– डॉ. अंबेडकर का बुत्त तोड़ने पर बसपा ने किया विरोध

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