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    International Women’s Day: जुनून हो तो ऐसा… दिव्यांगता पर भारी कविता का हौंसला, बोझ की बजाय बनी परिवार की ताकत

    International Women's Day
    International Women's Day: जुनून हो तो ऐसा... दिव्यांगता पर भारी कविता का हौंसला, बोझ की बजाय बनी परिवार की ताकत

    कंप्यूटर सेंटर खोलकर लड़कियों व महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

    सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। Antarrashtriya Mahila Diwas: भले ही जीवन में चुनौतियों का पहाड़ खड़ा हो, किंतु यदि इंसान हिम्मत, हौसला, जुनून और कुछ कर गुजरने की ठान ले तो शारीरिक अक्षमता भी आड़े नहीं आती है। बुलंद हौंसले व संघर्ष की अनूठी मिसाल पेश करने वाली सरसा की राजनीति विज्ञान प्रवक्ता कविता मेहता ने भी जिंदगी में कभी हार नहीं मानी और शारीरिक रूप से अक्षम (दिव्यांग) होते हुए भी खुद के बलबूते शिक्षा क्षेत्र में सफलता की लंबी दौड़ लगाई। कविता अपने परिवार पर बोझ बनने की बजाय उनकी ताकत बनी। International Women’s Day

    आज समाज में उनका कद इतना बढ़ गया है कि शिक्षार्थी ही नहीं, शिक्षक भी उनके इस जज्बे को सलाम करते हैं। कविता के पिता कुंदन लाल असीजा भी एक शिक्षक थे और माता ईश्वर देवी एक गृहणी थी। कुंदन लाल असीजा के चार बेटियां थी और कोई बेटा नहीं है। लेकिन फिर भी उन्होंने अपने माता-पिता को कभी पुत्र की कमी महसूस नहीं होने दी। दरअसल, कविता मेहता को बचपन में ही पोलियो हो गया था, जिससे उनके दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया। अपने छात्र जीवन में अनेक चुनौतियां झेली, लेकिन कविता के माता-पिता ने हमेशा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

    एफ ब्लॉक निवासी कविता ने बीए, एमए और बीएड की शिक्षा हासिल की। इसी दरमियान कई बार सरकारी नौकरी के लिए प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद कंप्यूटर कोर्स किया और दिशा वोकेशनल एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में कंप्यूटर प्रशिक्षक के रूप में नौकरी की। बतौर कंप्यूटर प्रशिक्षक उन्होंने लड़कियों, महिलाओं और दिव्यांगों को करियर को नया आकार देने के लिए शिक्षा दी। वहीं इसी दौरान पीजीडीसीए, एमएससी (कंप्यूटर साइंस), एमसीए किया और एचटीईटी की परीक्षा भी उत्तीर्ण की।

    2013 में मिली सरकारी नौकरी | International Women’s Day

    कविता को दिसंबर 2013 में हरियाणा शिक्षा विभाग में बतौर राजनीति विज्ञान प्रवक्ता नियुक्ति मिली। जनवरी 2014 में उन्होंने जीएसएसएस कंवरपुरा में कार्यभार ग्रहण किया और अगस्त 2016 में जीजीएसएसएस मेला ग्राउंड, सरसा में स्थानांतरित हो गई। सितंबर 2022 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय महावीर दल में कार्यभार ग्रहण किया। कविता का कहना है कि इन तीनों ही विद्यालयों में उनका परिणाम बहुत ही उत्कृष्ट रहा। उनके विद्यार्थी खंड व जिला स्तरीय प्रतियोगी कार्यक्रमों में पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं।

    सकारात्मक सोच और सकारात्मक कार्यों में रखती है विश्वास

    कविता का मानना है कि हर व्यक्ति की समाज के प्रति कुछ जिम्मेदारियां होती हैं और हमें लोगों की भलाई के लिए कुछ करना चाहिए। इसलिए मैंने हमेशा शिक्षा के क्षेत्र में लोगों की मदद करने की कोशिश की। मेरे विचार हमेशा आशावादी रहे हैं और मैं सकारात्मक सोच और सकारात्मक कार्यों में विश्वास रखती हूँ। शिक्षा के माध्यम से कोई भी कठिन परिस्थिति को पार किया जा सकता है, इसलिए मैं विशेष रूप से जरूरतमंद लोगों को तकनीकी शिक्षा प्रदान करना चाहती हूँ। वैसे मुझे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने का हमेशा जुनून था और इस पेशे ने मुझे बहुत सम्मान और पहचान दी।

    बच्चों के लिए बनी प्रेरणास्त्रोत

    कविता मेहता ने जीवन की जिन कठिन परिस्थितियों से पार पाकर सफलता हासिल की है, ऐसी चुनौतियों से जूझ रहे बच्चों के लिए वे प्रेरणास्त्रोत भी बन रही हैं। कविता ने वर्ष 2007 में कीर्ति नगर में आधार कंप्यूटर करियर पॉइंट की स्थापना की, जिसमें विशेष रूप से लड़कियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की शिक्षा दी। उनका कहना है कि इस अकादमी में बच्चों को न केवल कंप्यूटर में दक्ष बनाया जाता था, बल्कि उनके शैक्षणिक और व्यावसायिक करियर की संभावनाओं को लेकर उचित मार्गदर्शन और परामर्श भी दिया जाता था। जिसकी बदौलत बहुत से बच्चे आज अच्छे मुकाम तक जा पहुंचे हैं। International Women’s Day

    मेरी बेटी में आत्म सम्मान के साथ-साथ दृढ़ निश्चयता कूट-कूट कर भरी हुई है, ऐसी स्थिति में जब एक आम आदमी हिम्मत हार जाता है, लेकिन कविता ने शिक्षा को अपना हथियार बनाया और उन्हें केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया बल्कि बहुत से अन्य लोगों को भी प्रेरित किया। उसने हमेशा मेरे और अपने पिताजी के सपनों को पूरा किया। हमें अपनी बेटी पर नाज है।
                                                                                                       -ईश्वर देवी, कविता की माता।

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