प्रताप नगर (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)। Pratap Nagar News: वर्ष 2023 की बाढ़ के बाद सिंचाई विभाग के जगाधरी सर्कल में करवाए गए कामों में इस्तेमाल पत्थर पर रायल्टी न वसूले जाने से 2.12 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है। इसकी जांच करने के बाद विभाग की ही विजिलेंस विंग ने रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। जिसके बाद उस दौरान काम कराने वाले व लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के नाम विजिलेंस विंग ने जगाधरी सर्कल के एसई को पत्र लिखकर मांगे है। एसीएस के आदेशों के बाद विजिलेंस विंग के एग्जक्यूटिव इंजीनियर पचंकूला द्वारा यह पत्र लिखा गया है।
सिंचाई विभाग द्वारा करवाए जा रहे कामों में पत्थरों पर रायल्टी न जमा कराने मामला लगभग हर साल मीडिया की सुर्खिया बनता रहा है, मगर सिंचाई विभाग का जगाधरी सर्कल लगातार इसकी अनदेखी कर रहा था। मीडिया रिपोर्टस के बाद खनन विभाग द्वारा इस संबंध में अप्रैल 2024 में सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता को पत्र लिखकर कहा गया था कि विभाग की जिन-जिन साइटों पर बाढ़ बचाव के कार्य किए जा रहे है ओर वहां पर जो पत्थर लगाया जा रहा है। उनका ई-रवाना प्रस्तुत करें अन्यथा ठेकेदारों से खनिज की कीमत, रायल्टी, व पेनल्टी जमा कराई जाए। इसके बाद सिंचाई विभाग को रिमांइडर भी दिया गया। मगर सिंचाई विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया न ही खनन विभाग ने अपनी ओर से कोई कार्रवाई की।
बताया जाता है कि एक शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत सरकार को भेजी। जिसके बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने इसकी जांच की व शिकायर्ता को कथित रुप से संतुष्ट कर जांच को बंद कर दिया गया। मगर जब सरकार की ओर से इसकी जांच विजिलेंस विंग को सौंपी गई, तो विजिलेंस विंग करनाल ने इसकी गहराई से जांच की। जांच में खुलासा हुआ कि अधिकारियों ने PWD कोड और DNIT की महत्वपूर्ण धाराओं का पालन नहीं किया, जिसके कारण लगभग 425533.34 लाख MT बोल्डरों पर बिना रॉयल्टी काटे भुगतान किया गया। इससे सरकारी खजाने को ₹2,12,76,667/- का नुकसान हुआ है।
सिंचाई विभाग ने व खनन विभाग दोनों की लापरवाही का मामला
यह रिपोर्ट तो केवल एक वर्ष के दौरान इस्तेमाल बाढ़ राहत कार्य में इस्तेमाल किए गए पत्थरों को लेकर है। पिछले लंबे समय से पत्थर आदि के कार्यों में न तो कोई ई-रवाना लिया जाता है न ही कोई रायल्टी जमा कराई जा रही थी। सिंचाई विभाग तो काम कर इतिश्री कर लेता था तो वहीं खनन विभाग का संदेहास्पद मौन इसको बढ़ावा दे रहा था। रायल्टी, पेनल्टी, खनिज आदि के मामले की जांच का काम खनन विभाग का होता है। Pratap Nagar News
मगर वर्ष 2024 में खनन विभाग के जिस अधिकारी ने सिंचाई विभाग को पत्र लिख रायल्टी जमा कराने को कहा उसके तबादले के बाद से किसी अधिकारी ने इस पर न गौर किया न जांच किया। जबकि मामले की जांच इस विभाग द्वारा की जानी थी, यानी जांच के दायरे में केवल सिंचाई विभाग ही नहीं खनन विभाग के तत्कालीन अधिकारी भी आ सकते हैं। यह रिकवरी तो सिंचाई विभाग की विजिलेंस विंग ने अपनी जांच में बनाई है,अगर विजिलेंस विंग के अधिकारी इसकी ईमानदारी से जांच न करते तो इस बार भी यह मामला न उठ पाता। विजिलेंस विंग द्वारा एचकेबी सर्कल को लिखे गए पत्र की प्रति सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर को भी भेजी गई है।
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