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    सतगुरु-मालिक के प्रेम में छुपी है सारी खुशियां

    ऐसा प्यार जिसमें कोई गर्ज नहीं। गर्जी (स्वार्थी) प्यार हमेशा कच्चा होता हैै

    सरसा (सकब)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि प्रेम के अक्षर अढ़ाई हैं, लेकिन अल्लाह, वाहेगुरु, राम ने सारी बहारें, सारी खुशियां इन अढ़ाई अक्षरों में ही छुपा रखी हैं। प्यार का मतलब जिसकी समझ में आ गया, वो दोनों जहां की खुशियां इस जहां में हासिल कर लिया करते हैं। यहां जिस प्यार का जिक्र है, वो प्यार आत्मिक प्यार है, रूहानी प्यार हैै।

    ऐसा प्यार जिसमें कोई गर्ज नहीं। गर्जी (स्वार्थी) प्यार हमेशा कच्चा होता हैै, जब तक कोई आपकी गर्ज पूरी करता है, जब तक हां में हां मिलाते हैं, तो प्यार बना रहता है और जैसे ही हां में हां मिलाना बंद कर दिया, चाहे वो बाप-बेटा हो, चाहे पति-पत्नी हो, चाहे यार, दोस्त-मित्र हो, रिश्ता-नाता टूटने में ज्यादा देर नहीं लगती। लेकिन एक बात जेहन, दिमाग में रखिए कि जो ज्यादा चापलूस होते हैं, उनकी बजाय वो लोग बेहतर हैं जो आपके मुंह पर आपका सच बता देंं।

    कई चापलूस दोस्त होते हैं, मान-बड़ाई करते रहते हैं और आदमी सोचता है कि मेरा मित्र यही है, लेकिन वो तो एक चापलूस है। उसने आपसे कोई काम लेना है या आपके पैसे से कोई चीज ले रहा है या आपसे फायदा उठा रहा है।

    शायद इसीलिए वह आपकी वाह-वाह कर रहा हो। इससे बढ़िया तो वो मित्र हैं, जो ज्यादा आपकी वाह-वाह तो नहीं करते, लेकिन आपमें अगर कोई कमी है तो आपके मुंह पर कह देते हैं कि तेरे में यह गंदी आदत है, इसको बदल डाल। सो हजारों मित्रों से ऐसा एक मित्र काफी है, जो आपको आपकी कमी बता दे। इसलिए चापलूस लोगों से सावधान रहो, गर्जी प्यार से बचकर रहो और सतगुरु, मालिक के प्यार से नाता जोड़ो।

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