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    डीजीपी ओपी सिंह को गरिमामय विदाई, मधुबन अकादमी में सम्मान परेड

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    Gharaunda News: डीजीपी ओपी सिंह को गरिमामय विदाई, मधुबन अकादमी में सम्मान परेड

    बोले– ‘रिटायर’ से परहेज नहीं, ‘टायर’ शब्द खटकता है, अपराधियों से 36 का आंकड़ा बनाकर रखना होगा,अपराध बन चुका है इंडस्ट्री, डर के दम पर चल रहा सिस्टम

    घरौंडा (सच कहूँ न्यूज़)। Gharaunda News: मधुबन स्थित हरियाणा पुलिस अकादमी में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह के सेवानिवृत्त होने पर गरिमामय विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान पुलिस की टुकड़ियों ने उन्हें सम्मान परेड के साथ सलामी दी। अधिकारियों और जवानों ने उनके लंबे सेवाकाल को याद करते हुए भावभीनी विदाई दी। कार्यक्रम में हरियाणा पुलिस अकादमी के निदेशक ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया, जबकि धन्यवाद संबोधन अकादमी की पुलिस अधीक्षक द्वारा दिया गया। समारोह के दौरान मुख्य अतिथि को स्मृतिस्वरूप स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया। Gharaunda News

    बुधवार को समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत में ओपी सिंह ने अपने करियर, पुलिस व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और समाज की भूमिका पर खुलकर विचार रखे। उन्होंने कहा कि उन्हें “रिटायर” शब्द से कोई परहेज नहीं है, लेकिन “टायर” शब्द उन्हें परेशान करता है। जब तक कोई सरकार को सेवाएं देता है, तब तक वह रिटायर नहीं होता, केवल जिम्मेदारियां बदलती हैं। उन्होंने कहा कि इंडियन पुलिस में उनका पूरा करियर सपनों जैसा रहा। आईपीएस बनने के समय उन्होंने जैसा करियर सोचा था, उससे दोगुना बेहतर अनुभव उन्हें मिला।

    पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या उनके कार्यकाल में कोई काम अधूरा रह गया, ओपी सिंह ने स्पष्ट कहा कि अधूरा तब कहा जाता जब पुलिस बंद हो जाती। पुलिस एक सतत संस्था है, जो पहले भी थी और आगे भी रहेगी। डीजीपी आते-जाते रहते हैं, लेकिन सिस्टम चलता रहता है। आने वाले डीजीपी को भी अपराधियों से 36 का आंकड़ा बनाकर रखना होगा। ठगों को दौड़ाकर रखना पड़ेगा और आम लोगों से सम्मानजनक व्यवहार करना होगा। उन्होंने कहा कि पुलिस का मूल दायित्व कभी नहीं बदलता।

    गैंगस्टर और ठगों से लड़ाई उम्रभर चलने वाली | Gharaunda News

    गैंगस्टरों के खिलाफ कड़े रुख पर पूछे गए सवाल के जवाब में ओपी सिंह ने कहा कि यह पूरी उम्र की लड़ाई है। अपराधियों से 36 का आंकड़ा बनाकर रखना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केवल लाठी ही नहीं, बल्कि कलम भी उतनी ही जरूरी है। ठगी और बदमाशी की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यह लड़ाई सिर्फ पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है।

    अपराध बन चुका है इंडस्ट्री, डर के दम पर चल रहा सिस्टम

    ओपी सिंह ने कहा कि कॉन्ट्रेक्ट किलिंग, एक्सटोर्शन और अन्य आपराधिक गतिविधियां अब एक बड़ी इंडस्ट्री का रूप ले चुकी हैं। सोशल मीडिया, इंटरटेनमेंट और छुटभैये बदमाश मिलकर ऐसा माहौल बना देते हैं कि एक कॉल आते ही लोग डर से टूट जाते हैं। उन्होंने कहा कि बाकी अपराध एक तरफ और धमकी भरी कॉल एक तरफ रख दी जाती है, जिससे पूरा सिस्टम प्रभावित होता है। ऐसे अपराधियों के खिलाफ खड़ा होना केवल पुलिस का नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है।

    हर नागरिक बिना वर्दी का पुलिस अधिकारी

    पुलिस की ऐतिहासिक भूमिका का जिक्र करते हुए ओपी सिंह ने बताया कि 1829 में सर रॉबर्ट पील ने लंदन में पुलिस की स्थापना की थी। उनका कहना था कि “एवरी सिटीजन इज ए पुलिस ऑफिसर विदआउट यूनिफॉर्म।” नए कानून में भी यह प्रावधान है कि यदि किसी व्यक्ति को अपराध की जानकारी है और वह पुलिस को सूचना नहीं देता, तो वह भी दोषी माना जाएगा। अपराध रोकना सामूहिक जिम्मेदारी है। यह सोच गलत है कि अपराध केवल पुलिस के गले में डाल दिए जाएं और समाज सिर्फ आलोचना करे।

    मेरा जीवन ही मेरा संदेश

    ओपी सिंह ने कहा कि उनका जीवन ही उनका संदेश है। अगर कोई मजदूर की मानसिकता से काम करता है, तो यह देश “लाटसाब” का नहीं है। अंग्रेज चले गए हैं। जनता ने टैक्स मनी इकट्ठा कर ठगों और बदमाशों के खिलाफ एक संस्था बनाई है। पुलिस की ड्यूटी है कि जनता की संतुष्टि के अनुसार अपराधियों को जेल पहुंचाए। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि पुलिस सेवा एक शानदार करियर है। सिस्टम को प्रॉब्लेम सॉल्वर और वैल्यू क्रिएटर चाहिए। जो समाज के लिए समाधान और मूल्य तैयार करेगा, उसके लिए यह ड्रीम करियर है।

    ओपी सिंह हरियाणा कैडर के 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने 33 वर्ष से अधिक के सेवाकाल में कई चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और राज्य की जनता को शानदार सेवाएं दीं। वे हरियाणा पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन के प्रबंधक निदेशक भी रहे। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 2008 में सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक और 2017 में विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया।

    ये रहे कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ अधिकारी

    कार्यक्रम में मधुबन पुलिस अकादमी निदेशक डॉ चावला , सोनीपत की पुलिस आयुक्त ममता सिंह, करनाल रेंज के एडीजीपी डॉ एम रवि किरण, एडीजीपी एडमिन अमिताभ सिंह ढिल्लों, गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त विकास अरोडा, ट्रैफिक एंड हाईवे के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक हरदीप सिंह दून, झज्जर की पुलिस आयुक्त डॉ राजश्री सिंह, रोहतक रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सिमरदीप सिंह, साउथ रेंज रेवाड़ी की पुलिस महानिरीक्षक नाजनीन भसीन सहित न्यायवैद्यक प्रयोगशाला मधुबन और विभिन्न पुलिस इकाइयों के अधिकारी, कर्मचारी व अतिथि उपस्थित रहे।

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