India Pakistan Exchange Nuclear List: नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान ने नववर्ष के पहले दिन, 1 जनवरी को, एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यवस्था के अंतर्गत अपने-अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का परस्पर आदान-प्रदान किया। इस व्यवस्था का उद्देश्य दोनों देशों को एक-दूसरे की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने से रोकना है। यह परंपरा बीते तीन दशकों से हर वर्ष नए साल की शुरुआत में निभाई जा रही है। India Pakistan News
यह प्रक्रिया ऐसे समय में संपन्न हुई है, जब मई में पहलगाम आतंकी हमले के बाद उपजे सैन्य तनाव के चलते दोनों देशों के संबंधों में ठंडापन बना हुआ है। उक्त हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी, जिसके बाद चार दिनों तक सीमित सैन्य टकराव भी देखने को मिला था।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने जानकारी देते हुए बताया कि यह आदान-प्रदान परमाणु ठिकानों और सुविधाओं पर हमले की रोक से जुड़े समझौते के प्रावधानों के अनुरूप किया गया। यह प्रक्रिया नई दिल्ली और इस्लामाबाद में राजनयिक माध्यमों से एक साथ पूरी की गई। India Pakistan News
एमईए के अनुसार, “भारत और पाकिस्तान ने आज राजनयिक चैनलों के जरिए, नई दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ, परमाणु ठिकानों और सुविधाओं पर हमले पर रोक लगाने वाले समझौते के अंतर्गत आने वाली सूचियों का आदान-प्रदान किया।”
यह समझौता 31 दिसंबर 1988 को हस्ताक्षरित हुआ था और 27 जनवरी 1991 से प्रभाव में आया। इसके तहत दोनों देशों के लिए यह अनिवार्य है कि वे हर कैलेंडर वर्ष की पहली तारीख को अपने परमाणु ठिकानों की जानकारी एक-दूसरे को दें। विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह ऐसी सूचियों का लगातार 35वां आदान-प्रदान है। पहली बार यह प्रक्रिया 1 जनवरी 1992 को पूरी की गई थी।
कैदियों और मछुआरों की सूची भी साझा | India Pakistan News
इसी क्रम में, भारत और पाकिस्तान ने 2008 के कांसुलर एक्सेस समझौते के अंतर्गत एक-दूसरे की हिरासत में मौजूद नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूचियां भी साझा कीं। यह आदान-प्रदान भी राजनयिक चैनलों के माध्यम से एक साथ किया गया।
भारत ने पाकिस्तान की हिरासत से जुड़े 391 नागरिक कैदियों और 33 मछुआरों की जानकारी साझा की, जिनके पाकिस्तानी नागरिक होने की पुष्टि या आशंका है। वहीं पाकिस्तान ने अपनी ओर से 58 नागरिक कैदियों और 199 मछुआरों की सूची भारत को सौंपी, जिनके भारतीय नागरिक होने की संभावना है।
एमईए ने दोहराया कि भारत सरकार ने पाकिस्तान से नागरिक कैदियों, मछुआरों, उनकी नौकाओं तथा लापता भारतीय रक्षा कर्मियों की शीघ्र रिहाई और स्वदेश वापसी का आग्रह किया है। साथ ही उन 167 भारतीय नागरिकों और मछुआरों को तत्काल रिहा करने की मांग की गई है, जो अपनी सजा पूरी कर चुके हैं।
तनावपूर्ण बने रिश्ते | India Pakistan News
2025 की शुरुआत में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाक संबंधों में गंभीर तनाव देखने को मिला। इसके मद्देनज़र भारत ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाए।
भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद और संवाद साथ-साथ नहीं चल सकते। इसी नीति के तहत भारत ने द्विपक्षीय संपर्क सीमित किए और सिंधु जल संधि में अपनी भागीदारी को भी निलंबित किया, जो 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से अस्तित्व में आई थी। यह कदम इस बात को दर्शाता है कि भारत सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को कितनी गंभीरता से ले रहा है।















