
Haryana Railway News: प्रतापनगर, राजेन्द्र कुमार। अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों और यात्रियों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते वर्ष जहां करीब 200 ट्रेनों का संचालन स्टेशन से हो रहा था, वहीं इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 233 तक पहुंच गई है। हालात ऐसे हैं कि एक के पीछे एक ट्रेन दौड़ रही है, जिससे न सिर्फ रेल पटरियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है, बल्कि यात्रियों को भी कई तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
इस बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से पूर्व मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) मंदीप सिंह भाटिया द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव तैयार किया गया था। प्रस्ताव के तहत अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन के समीप स्थित बीसीएन डिपो क्षेत्र में नई रेल लाइन बिछाने की योजना बनाई गई थी। विभागीय अधिकारियों ने इसके लिए सर्वे कर रिपोर्ट भी तैयार की, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते यह प्रस्ताव अब ठंडे बस्ते में चला गया है।
कहने को आठ, हकीकत में सिर्फ छह प्लेटफार्म | Haryana Railway News
कैंट रेलवे स्टेशन पर कागजों में सात प्लेटफार्म और पैसेंजर ट्रेनों के लिए प्लेटफार्म 1-ए दर्शाया गया है, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है। प्लेटफार्म नंबर एक के अलावा प्लेटफार्म दो और तीन को ही जरूरत पड़ने पर प्लेटफार्म चार का दर्जा दिया जाता है। इसके अतिरिक्त प्लेटफार्म छह और सात मौजूद हैं। इस तरह देखा जाए तो स्टेशन पर वास्तव में केवल छह ही उपयोगी प्लेटफार्म हैं। इनमें सबसे छोटे प्लेटफार्म प्लेटफार्म एक और 1-ए हैं, जहां ट्रेनों की आवाजाही सीमित रहती है।
छह प्लेटफार्मों पर 233 ट्रेनों का संचालन
स्टेशन के छह प्लेटफार्मों पर प्रतिदिन कुल 233 ट्रेनों का आवागमन हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार—
प्लेटफार्म 1 पर 48 ट्रेनें
प्लेटफार्म 2 पर 64 ट्रेनें
प्लेटफार्म 3 पर 26 ट्रेनें
प्लेटफार्म 4 पर 21 ट्रेनें
प्लेटफार्म 6 पर 22 ट्रेनें
प्लेटफार्म 7 पर 42 ट्रेनें
प्लेटफार्म 1-ए पर 10 ट्रेनें
इतनी बड़ी संख्या में ट्रेनों के संचालन के कारण स्टेशन पर हर समय भीड़ और व्यस्तता बनी रहती है।
रेल प्रशासन का बयान
इस पूरे मामले पर मंडल रेल प्रबंधक अंबाला विनोद भाटिया ने कहा,
“फिलहाल ऐसी कोई परियोजना प्रस्तावित नहीं है। भविष्य में यदि आवश्यकता पड़ी तो रेल लाइनों के विस्तार पर विचार किया जाएगा।”
यात्रियों में बढ़ती चिंता
नई रेल लाइन की योजना के रुकने से यात्रियों में निराशा है। उनका मानना है कि यदि समय रहते बुनियादी ढांचे का विस्तार नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।














