Manoj Naravane Book controversy: नई दिल्ली। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की पुस्तक को लेकर उपजे विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पहले पुस्तक से संबंधित एक बयान सामने आया, बाद में कहा गया कि वह आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुआ। उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि वह अधिकृत दस्तावेज नहीं था तो वह सार्वजनिक क्षेत्र में कैसे पहुंचा और विपक्षी नेताओं तक कैसे पहुंच गया। Priyanka Chaturvedi
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जिस घटना का उल्लेख किया जा रहा है, उसमें न तो कोई हताहत हुआ, न कोई घायल हुआ और न ही किसी प्रकार का क्षेत्रीय अतिक्रमण हुआ। ऐसे में उस समय लिए गए निर्णयों और घटनाक्रम की जानकारी सार्वजनिक करने में आपत्ति क्यों होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि महत्वपूर्ण अवसरों पर क्या निर्णय लिए गए और किन परिस्थितियों में लिए गए।
उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि जिस प्रकार प्रतिक्रिया दी जा रही है, उससे ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी विदेशी सैन्य अधिकारी की पुस्तक पर चर्चा हो रही हो, जबकि यह देश के पूर्व सेना प्रमुख की रचना है। उन्होंने पुस्तक के प्रकाशन को रोकने या उससे दूरी बनाने के प्रयासों को अनुचित बताया।
राज्यसभा सदस्य ने यह भी आरोप लगाया कि यदि वरिष्ठ सैन्य अधिकारी अपने अनुभव साझा करना चाहें तो उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई का संकेत देना उचित नहीं है। उनके अनुसार, इस प्रकार की स्थिति से यह संदेश जा सकता है कि सेवा अवधि के बाद भी अभिव्यक्ति पर नियंत्रण का दबाव बना रह सकता है। Priyanka Chaturvedi
‘वंदे मातरम’ और ‘वंदे भारत’ जैसे शब्दों में अंतर समझना भी आवश्यक
एक अन्य विषय पर बोलते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने ‘वंदे मातरम’ के मुद्दे पर कहा कि यह राष्ट्रगान-सदृश सम्मानित उद्घोष है और इसका ज्ञान सभी को होना चाहिए। उन्होंने स्मरण कराया कि पूर्व में सदन की परामर्श समिति में इसे लेकर आपत्ति जताई गई थी, जिसका उन्होंने विरोध किया था। उन्होंने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ और ‘वंदे भारत’ जैसे शब्दों में अंतर समझना भी आवश्यक है।
लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा पर उन्होंने कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार यदि अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है तो उसकी सुनवाई और संचालन नियमों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय वह सदन में उपस्थित नहीं थीं, किंतु प्रक्रियात्मक पारदर्शिता आवश्यक है।
दिल्ली की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि चुनावों के दौरान किए गए वादों की तुलना में जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने सुरक्षा, सड़क व्यवस्था और आधारभूत ढांचे को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में जवाबदेही और सुशासन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। Priyanka Chaturvedi















