Gautam Gambhir AI Case: नई दिल्ली। गौतम गंभीर ने अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने एक दीवानी वाद दायर कर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से तैयार किए जा रहे भ्रामक डिजिटल कंटेंट, डीपफेक वीडियो तथा बिना अनुमति उनके नाम, स्वर और छवि के उपयोग पर रोक लगाने की मांग की है। Gautam Gambhir News
याचिका में कहा गया है कि हाल के समय में सोशल मीडिया मंचों पर ऐसे अनेक वीडियो और सामग्री प्रसारित हो रही हैं, जिनमें उन्नत तकनीकों—जैसे फेस-स्वैपिंग और वॉइस-क्लोनिंग—का उपयोग कर उन्हें ऐसे वक्तव्य देते हुए दिखाया गया है, जो उन्होंने कभी दिए ही नहीं। इन भ्रामक सामग्रियों को लाखों बार देखा जा चुका है, जिससे आम जनता में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई।
याचिका में कई सोशल मीडिया खातों, तकनीकी कंपनियों तथा ई-कॉमर्स मंचों को पक्षकार बनाया गया
इसके अतिरिक्त, कुछ ऑनलाइन व्यापार मंचों पर भी उनके नाम और चित्र का उपयोग कर उत्पादों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, जबकि इसके लिए किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई। याचिका में कई सोशल मीडिया खातों, तकनीकी कंपनियों तथा ई-कॉमर्स मंचों को पक्षकार बनाया गया है। यह वाद कॉपीराइट अधिनियम 1957, ट्रेडमार्क अधिनियम 1999 तथा वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम 2015 के प्रावधानों के अंतर्गत दायर किया गया है। साथ ही, न्यायालय के पूर्व निर्णयों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें सार्वजनिक व्यक्तियों के व्यक्तित्व अधिकारों को संरक्षित करने पर बल दिया गया है।
याचिकाकर्ता ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि संबंधित आपत्तिजनक सामग्री को तत्काल हटाने के निर्देश दिए जाएं, भविष्य में इस प्रकार के उपयोग पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जाए तथा क्षतिपूर्ति के रूप में आर्थिक हर्जाना प्रदान किया जाए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उनकी पहचान—नाम, स्वर और छवि—का दुरुपयोग भविष्य में न हो। अपने वक्तव्य में गौतम गंभीर ने कहा कि उनकी पहचान का दुरुपयोग कर झूठी सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं और इससे आर्थिक लाभ भी अर्जित किया जा रहा है। उन्होंने इसे केवल व्यक्तिगत क्षति का विषय न बताते हुए, डिजिटल युग में प्रत्येक सार्वजनिक व्यक्ति की गरिमा और अधिकारों की रक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। Gautam Gambhir News















