प्रताप नगर (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)। Pratap Nagar News: पैक्स ईस्माइलपुर में अवैध रूप से की गई नियुक्तियों व पैक्स में गबन की जांच के लिए समिति के पूर्व डायरेक्टर और पूर्व डिप्टी चेयरमैन ने पैक्स के जनरल मैनेजर और मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार से जांच की मांग की है। दी गई शिकायत में समिति के पूर्व डिप्टी चेयरमैन प्रवीण कुमार, पूर्व डायरेक्टर देशराज,सदस्य सुभाष कुमार, रमेश चंद, नरेंद्र सिंह,जय सिंह सैनी पूर्व डायरेक्टर, सरपंच लाकड़ सुरेंद्र कुमार आदि ने बताया कि पैक्स इस्माइलपुर में करोड़ों का गबन हुआ है जिसकी जांच होनी चाहिए। यदि नियमानुसार जांच हो जाय तो गबन का आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है।
इसके साथ ही सरकार के बैन के बाद भी सरकार के आदेशों को ताक पर रखकर समिति में नई नियुक्तियां की गई है। पैक्स में बहुत से सदस्यों की एफडी के अगेंस्ट लोन लेकर पैसे का गबन किया गया है। शिकायत में बताया गया कि पैक्स में किराए के लिए जो ट्रैक्टर और अन्य खेती में प्रयोग होने वाले यंत्र है उसे किराए पर न देकर प्रबंधक ने अपने खेतों में चलाया है और पैक्स में कोई किराया जमा नहीं कराया जिससे पैक्स को राजस्व का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के भी एक दो कर्मचारियों की प्रबंधक के साथ मिली भगत है जिसकी जांच होनी चाहिए। वहीं शिकायत में आरोप लगाया की बहुत से फैक्स सदस्यों की एफडी की कॉपियां फाड़ दी गई ऐसा क्यों किया किया गया यह भ्रष्टाचार का एक सबूत साबित होता है वहीं शिकायत में पैक्स के प्रबंधक पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि पैक्स के रिकॉर्ड को प्रबंधक अपने घर पर रखता है यह भी भ्रष्टाचार का एक सबूत साबित होता है। Pratap Nagar News
वही ग्रामीण और पूर्व डिप्टी डायरेक्टर ने पैक्स में नियुक्त किए गए कर्मचारियों के बारे में कहा कि जब पैक्स में नए कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है तो वह एक भी दिन काम पर नहीं आते और बैंक द्वारा उनकी सैलरी हर महीने उनके खातों में ना डालकर उनको नगद दी जाती है जबकि नियम अनुसार किसी भी कर्मचारी की सैलरी उनके खातों में आनी चाहिए यह भी जांच का विषय है। पूर्व डिप्टी चेयरमैन ने आरोप लगाया कि पैक्स का चुनाव 18 जुलाई 2018 में हुआ था उसके बाद पैक्स का कोई चुनाव नहीं हुआ जबकि हर 5 साल के बाद चुनाव होना अनिवार्य है और पैक्स में होने वाली प्रत्येक गतिविधि और राजस्व को लेकर समिति के डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर को सूचित करना होता है। लेकिन प्रबंधक और अन्य कर्मचारियों ने नियुक्तियों और अन्य राजस्व के कार्यों में कोई सहमति नहीं ली।
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