परंपरागत खेती छोड़ी, टपका सिंचाई से लिखी कामयाबी की नई कहानी
Farmer News: हिसार (सच कहूँ/मुकेश)। खेती में बदलाव की सोच और आधुनिक तकनीकों को अपनाने का जज्बा हो तो किसान नई मिसाल कायम कर सकता है। इसका जीता-जागता उदाहरण है हिसार के प्रभुवाला गांव के रहने वाले 50 वर्षीय किसान शिव शंकर, जिन्होंने परंपरागत खेती को छोड़कर आधुनिक खेती के जरिए देशभर में अपनी पहचान बनाई है। छह बहनों के इकलौते भाई शिव शंकर वर्ष 1995 से 25 एकड़ भूमि पर खेती कर रहे हैं। शुरूआत में उन्होंने पारंपरिक खेती की, लेकिन अधिक खर्च और कम आमदनी ने उन्हें नई राह अपनाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने वर्ष 2005 में 5 एकड़ में अमरूद का बाग लगाकर आधुनिक खेती की शुरूआत की। इसके बाद 2006 में 5 एकड़ में किन्नू, 2010 में आड़ू, फिर 2017 में मौसमी की खेती शुरू की। वर्ष 2020 में 4 एकड़ में नेट हाउस स्थापित कर उन्होंने अपनी खेती को और उन्नत बनाया।
75% पानी की बचत के साथ आय कई गुना बढ़ाई | Hisar News
उनकी खेती की सबसे खास बात यह है कि पूरी फसल टपका (ड्रिप) सिंचाई प्रणाली से की जाती है, जिससे करीब 75 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। शिव शंकर बताते हैं कि वर्ष 2005 में जब नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन शुरू हुआ, तब उन्होंने सबसे पहले ड्रिप इरिगेशन और वाटर टैंक को अपनाया था।
शिव शंकर का कहना है कि पहले पारंपरिक खेती में लागत अधिक और मुनाफा कम था, लेकिन आधुनिक तकनीक अपनाने के बाद उनकी आय में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। उनका दावा है कि यदि किसान आधुनिक खेती अपनाएं तो उनकी आमदनी चार गुना तक बढ़ सकती है।
उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें 50 से अधिक बार विभिन्न मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2020-21 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा ‘कृषि रत्न’ सम्मान से नवाजा गया। इसके अलावा हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और कृषि मंत्री जेपी दलाल सहित कई मंचों पर उन्हें सम्मान मिल चुका है।
शिव शंकर का फार्म आज एक मॉडल फार्म बन चुका है
शिव शंकर का फार्म आज एक मॉडल फार्म बन चुका है, जहां हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़ और कश्मीर तक से किसान आधुनिक खेती को समझने के लिए पहुंचते हैं। स्कूलों के बच्चे भी उनके फार्म का दौरा कर खेती के नए तरीके सीखते हैं। उनकी सफलता की कहानी को दूरदर्शन के दिल्ली, रोहतक और हिसार केंद्रों ने भी अपने ह्यकृषि दर्शनह्ण कार्यक्रम में प्रमुखता से दिखाया है।
भविष्य की योजनाओं के बारे में शिव शंकर बताते हैं कि अब वे मरुस्थलीय फसलों जैसे बेर, अंजीर, खजूर, फालसा और लहसुन की खेती पर काम कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपने फार्म पर पेठा (कद्दू) के विशेष बीज का सफल ट्रायल किया है, जिसमें बेल फैलने के बजाय पौधा करीब 4 फीट ऊंचाई पर ही फल देने लगता है। जल्द ही यह बीज बाजार में उपलब्ध होगा, जिससे अन्य किसान भी इसका लाभ उठा सकेंगे। शिव शंकर का लक्ष्य है कि वर्ष 2032 से 2035 तक वे अपनी पूरी खेती को न्यूनतम पानी पर आधारित कर दें। Hisar News















