पीआरजीआई ने किया टाइटल कैंसिल, अकादमी की लापरवाही पर उठे सवाल
बीकानेर। राजस्थानी भाषा-साहित्य जगत के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर की मासिक पत्रिका ‘जागती जोत’ का टाइटल प्रेस रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (पीआरजीआई) द्वारा कैंसिल कर दिया गया है। इसके साथ ही अब इस पत्रिका का प्रकाशन पूरी तरह से बंद होने की स्थिति में आ गया है। वर्ष 1973 में पंजीकृत ‘जागती जोत’ को राजस्थानी भाषा की एकमात्र सरकारी पत्रिका माना जाता रहा है। ऐसे में इसका टाइटल रद्द होना न केवल प्रशासनिक चूक माना जा रहा है, बल्कि इसे राजस्थानी भाषा की मान्यता और प्रतिष्ठा के लिए भी गंभीर झटका माना जा रहा है। Bikaner News
सूत्रों के अनुसार, वार्षिक विवरणिका ऑनलाइन प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण यह स्थिति बनी। पीआरजीआई ने इसके लिए बाकायदा ऑनलाइन नोटिस भी जारी किए, लेकिन अकादमी प्रबंधन ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया।इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग उठ रही है। अब टाइटल रद्द होने के बाद पत्रिका का प्रकाशन करना, उससे संबंधित बिल पास करना और अन्य वित्तीय कार्यवाही पूरी तरह गैरकानूनी मानी जाएगी।
साहित्यकारों और राजस्थानी भाषा से जुड़े लोगों में भारी रोष व्याप्त
इस घटनाक्रम से साहित्यकारों और राजस्थानी भाषा से जुड़े लोगों में भारी रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि यह केवल एक पत्रिका का बंद होना नहीं, बल्कि राजस्थानी भाषा के विकास की उपेक्षा का प्रतीक है। स्थिति को और गंभीर बनाते हुए यह तथ्य भी सामने आया है कि पिछले दो वर्षों से पत्रिका का नियमित प्रकाशन लगभग ठप पड़ा था। कभी-कभार बैक डेट में संयुक्त अंक निकालकर औपचारिकता पूरी की जा रही थी, जबकि पोस्टल रजिस्ट्रेशन की समय-सीमा भी समाप्त हो चुकी है और इसका नवीनीकरण होना भी लगभग असंभव है।
इस लापरवाही के बाद अकादमी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि संस्थान की आय के स्रोत लगभग बंद हो चुके हैं और गतिविधियां सीमित होकर केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सिमट गई हैं। हाल ही में 18 मार्च को राजस्थान दिवस कार्यक्रम के दौरान एक वरिष्ठ साहित्यकार के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला भी चर्चा में रहा, जिससे असंतोष और बढ़ा है। साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और राजस्थानी भाषा के संरक्षण हेतु ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो ‘जागती जोत’ का पुनः प्रकाशन लगभग असंभव हो जाएगा। Bikaner News















