जीवनदास तनेजा का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज
गोरीवाला (सच कहूँ/अनिल)। उपतहसील गोरीवाला के गांव गोदीकां से एक शिक्षक 30 मार्च को राजकीय विद्यालयों में लगभग 30 वर्ष का अवैतनिक कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। जिनका नाम है जीवनदास तनेजा। उन्होंने बिना किसी वेतन के उन सरकारी स्कूलों में बच्चों को शिक्षित करने में अपना जीवन समर्पित किया, जहां अध्यापकों की कमी थी। उनकी इस सेवा के लिए उनका नाम जेम्स बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। शिक्षक का सपना बच्चों को शिक्षित करना था, जो अब अपने अंतिम चरण में है। Sirsa News
उन्होंने बताया कि यह सामाजिक कार्य उनकी दादी और माता-पिता के अच्छे संस्कारों के कारण संभव हो पाया। उनके माता-पिता हमेशा कहते थे कि पैसा जिंदगी के लिए जरूरी है, पर सब कुछ नहीं है; अगर संभव हो तो जरूरतमंद की मदद करनी चाहिए। इसी सीख से प्रेरित होकर उन्होंने शिक्षा की अत्यधिक आवश्यकता वाले स्थानों पर पढ़ाने का संकल्प लिया। शुरूआत में यह कार्य थोड़ा मुश्किल था, लेकिन उनके परिवार, मां, पत्नी, बच्चों और मित्रों ने इसमें बहुत सहयोग किया।
किसी ने सराहा तो किसी ने कहा कर रहा अपना समय खराब: जीवनदास | Sirsa News
जीवनदास तनेता कहते हैं कि इन 30 सालों में मेरी कोशिश यह रही कि मेरे कारण बच्चों को पढ़ाई में कोई परेशानी न झेलनी पड़े और बिना किसी जरूरी कार्य कि मैं घर पर न रहूं। इन वर्षों में बहुत से बुद्धिजीवी, शिक्षाविद साथियों से मिलन हुआ। जिन्होंने मुझे काफी प्रोत्साहित किया, परंतु कुछ ऐसे साथी भी मिले जिन्होंने मुझे अपना समय व्यर्थ करने की बात भी कही। अधिकतर अध्यापक साथियों का व्यवहार बहुत ही मैत्रीपूर्ण और सराहनीय रहा। विभिन्न ग्राम पंचायत, सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं, क्लब व अकेडमी, एसडीएम डबवाली, उपायुक्त द्वारा विशेष अवसरों पर सम्मानित किया गया। विभिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से भी मेरा मनोबल को बढ़ाया गया। जिसमें सच कहूं का विशेष सहयोग रहा। मेरा मनोबल उसे समय काफी प्रफुल्लित हुआ जब मेरा नाम इंडिया बुक आॅफ रिकॉर्ड्स व जेम्स बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ।
साक्षरता मिशन के तहत लिया मुफ्त पढ़ाने का निर्णय | Sirsa News
जीवनदास तनेजा ने 1986 में नेशनल कॉलेज सरसा से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान साक्षरता मिशन की शुरूआत हुई, जिसमें उन्होंने बिना किसी मेहनताना के हिस्सा लेकर अपना मिशन शुरू किया। वर्ष 1996 में, राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय गोरीवाला में अध्यापकों की कमी के कारण उन्हें पढ़ाने का अवसर मिला। उन्होंने इस विद्यालय में लगातार नौ वर्षों तक लड़कियों को शिक्षा दी। इसके बाद उन्होंने छह महीने राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय कालुआना में और फिर तीन महीने गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल अहमदपुर दारेवाला में अपनी सेवाएं दीं।
अप्रैल 2006 से 7 मई 2017 तक,उन्होंने राजकीय प्राथमिक पाठशाला अहमदपुर दारेवाला में बच्चों को शिक्षा प्रदान की। 8 मई 2017 से, स्टाफ की कमी के कारण ग्राम पंचायत गोदिका के आग्रह पर,वे राजकीय प्राथमिक पाठशाला गोदिका में अवैतनिक सेवाएं दे रहे हैं। वे 20 मार्च 2026 को 62 वर्ष पूरे कर अपनी सेवा से सेवानिवृत्त होंगे। 31 मार्च 2026 तक निरंतर जारी रहेंगी। दूरस्थ शिक्षा से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। Sirsa News















