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    Lahsun ki Kheti: हरियाणा में किसानों का लहसुन की खेती की ओर बढ़ा रूझान, मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर बढ़ा क्षेत्रफल 

    Lahsun ki Kheti
    Lahsun ki Kheti: किसानों को तकनीकी जानकारी देते विशेषज्ञ डॉ विमलेश कुमार व लहसुन की फसल को उखाड़ते हुए महिला श्रमिक।

    पारंपरिक खेती छोड़ सब्जी की खेती में रूचि ले रहे किसान, बढ़ा मुनाफा

    • करनाल में सबसे ज्यादा उगाया गया लहसुन

    यमुनानगर (सच कहूँ/लाजपतराय)। Lahsun ki Kheti: भले ही लहसुन में किसानों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती हैं व पैदावार से लेकर हार्वेस्ंिटग तक फसल के रखरखाव के लिए किसानों को काफी पसीना बहाना पड़ता है, बावजूद इसके किसानों में लहसुन की खेती की ओर काफी रूझान बढ़ा है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर 2024-25 वर्ष की अपेक्षा 2025-26 में 1627 एकड़ एरिया अधिक होने के साथ-साथ 1423 किसानोें की संख्या भी बढ़ी है। ऐसे में किसान धान व गेहूँ की फसल के अलावा अन्य फसलों में भी रूचि ले रहे हैं।

    जानकारी के अनुसार मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर 2024-25 में 4713 एकड़ में 3829 किसानों ने लहसुन रोपित किया था। जबकि वर्ष 2025-26 में 6340 एकड़ में 5251 किसानों ने लहसुन की खेती की है। बता दें कि करनाल जिले के इंद्री ब्लॉक व यमुनानगर जिले का रादौर ब्लॉक लहसुन की खेती का हब माना जाता है।  Lahsun ki Kheti

    मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल के अनुसार प्रदेश में लहसुन उत्पादन में करनाल पहले स्थान पर है, जो 2949 एकड़ में 2318 किसानों को दर्शाया गया है। जबकि सत्यापित एक हजार है, वहीं दूसरे स्थान पर यमुनानगर जिला है, जो 1408 एकड़ में 1255 किसानों का आंकड़ा दर्शाया गया है जबकि सत्यापित 293 है। जिला सरसा तीसरे स्थान पर हैं, जिसका पोर्टल आंकड़ा 719 एकड़ व 481 किसान दर्शाए गए है जबकि सत्यापित 315 है।

    इन दिनों लहसुन फसल की हार्वेस्ंिटग का कार्य जोरोें पर है। इसके लिए विशेषज्ञ किसानों को खेतों में जाकर हार्वेस्ंिटग के साथ-साथ फसल के स्टॉक के बारे में  विशेष रूप से जानकारी दे रहे हैं। ताकि किसान अपनी लहसुन की फसल को अच्छे से हार्वेस्ट कर सुरक्षित तकनीक के साथ सुरक्षित स्थान पर स्टॉक कर सकें व समय अनुसार फसल को बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकें।

    श्रमिकों की किल्लत का करना पड़ रहा सामना | Lahsun ki Kheti

    यमुनानगर के गांव बुबका के किसान जोगिन्द्र, महिन्द्र व प्रवीन कुमार ने बताया कि वे हर साल लहसुन की खेती करते हैं। लहसुन को तैयार करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। उन्होेंने बताया कि आधुनिक युग मशीनी युग हैं। अधिकतर फसलों की कटाई व बुआई के लिए श्रमिकों की कम जरूरत पड़ती है, जबकि लहसुन की फसल को लगाने व कटाई दोनोें में सबसे अधिक मजदूरों की समस्या का सामना करना पड़ता है। उन्होेंने बताया कि इन दिनों लहसुन फसल की हार्वेस्ंिटग जोरों पर हैं लेकिन आए दिन मौसम की बेरूखी भी फसल के लिए उनको नुकसान देने वाली बन रही है। विशेषज्ञों की मानें तो फसल को पूरी तरह से सुखा कर स्टॉक करना होता है। लेकिन मौसम है कि आए दिन बिगड़ रहा है जो उनकी परेशानी को बढ़ा रहा है।

    लहसुन को स्टॉक से पहले अच्छी तरह से  सुखाएं: डॉ. विमलेश

    राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान सलारू करनाल के तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. विमलेश कुमार ने लहसुन उत्पादक किसानों को लहसुन के स्टॉक की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि इन दिनों लहसुन की हार्वेस्ंिटग जोरो पर हैं। किसानों द्वारा हार्वेस्ंिटग की जा रही है। उन्होेंने किसानों को आह्वान कि वे लहसुन की फसल को सुरक्षित रखने के लिए स्टॉकिंग से पूर्व अच्छी तरह से सुखाएं, ताकि नमी के कारण फसल स्टॉक में खराब न हो ओर स्टॉक में लहसुन की गांठों को बाहर व तना अंदर की ओर रखते हुए शैड या खुले एवं हवादार कमरे में लगाएं।  दो स्टॉक के बीच कम से कम 2 फुट का अंतर रखें। उन्होेंने किसानों से कहा कि गीला लहसुन हल्की नमी से उखाडे। Lahsun ki Kheti

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