भूना (सच कहूँ/संगीता रानी)। Beekeeping Farming: कभी खेतिहर मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाली बोस्ती गांव की 52 वर्षीय गीता देवी आज मधुमक्खी पालन के जरिए आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। उन्होंने न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि गांव की दर्जनों महिलाओं को भी रोजगार देकर उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है। गीता देवी ने वर्ष 2011 में सीमित संसाधनों के साथ मधुमक्खी पालन शुरू किया था। शुरूआती दौर में कई चुनौतियां सामने आईं—कभी उत्पादन कम रहा तो कभी बाजार की जानकारी का अभाव रहा। Beekeeping
लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार सीखते हुए अपने काम को आगे बढ़ाया। आज उनके पास करीब 500 मधुमक्खी बॉक्स हैं और वे बेरी, सरसों, मल्टी फ्लावर, नीम, अजवायन व तुलसी जैसे विभिन्न प्रकार के शहद का उत्पादन कर रही हैं।
शुद्धता और गुणवत्ता के कारण उनके शहद की बाजार में अच्छी मांग है। उनके उत्पाद 400 से 1000 रुपए प्रति किलो तक बिकते हैं। गीता देवी सतगुरु हन्नी पॉट बोस्ती ब्रांड के नाम से अपने उत्पाद बेच रही हैं। वे सरस मेले जैसे बड़े आयोजनों में स्टॉल लगाकर ग्राहकों तक सीधे पहुंचती हैं, जिससे उनकी पहचान और मजबूत हुई है।
ब्लॉक व प्रदेश स्तर पर हो चुकी कई बार सम्मानित | Beekeeping
उनकी सफलता की खास बात यह है कि उन्होंने गांव की कई महिलाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें रोजगार दिया है। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं और परिवार की आय में योगदान दे रही हैं। उनकी मेहनत को देखते हुए उन्हें ब्लॉक व प्रदेश स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है। पांच बच्चों की मां गीता देवी के इस काम में उनके बेटे-बेटियां भी सहयोग कर रहे हैं। गीता देवी की कहानी यह साबित करती है कि मजबूत इरादों और लगातार मेहनत से किसी भी परिस्थिति को बदला जा सकता है। वे आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की प्रेरणा बन चुकी हैं।
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