अंबाला कैंट (सच कहूँ/कंवरपाल)। मौत अमूमन एक सन्नाटा और बिखराव लेकर आती है, लेकिन पूजा विहार जिला अम्बाला के राम शंकर इन्सां की विदाई ने समाज को ठहरकर सोचने पर मजबूर कर दिया। राम शंकर इन्सां में सेवा का जज्बा सतगुरु जी की प्रेरणा से कूट-कूट कर भरा हुआ था। 73 वर्षीय रामशंकर उम्र में भी सेवा कार्य में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते थे। उनकी बड़ी बेटी हरियाणा की सच्चे नम्र सेवादार है। बेटा भी प्रेमी सेवक के रूप में कार्य कर रहा है, उनकी पत्नी भी पक्की सेवा ली हुई हैं और वे हर महीने सेवा में जाती हैं। Ambala News
परिवार ने पूरी की अंतिम इच्छा, बेटियों ने दिया अर्थी को कंधा
जिस समय राम शंकर इन्सां ने शरीर का त्याग किया वो सरसा दरबार में सेवा में गई हुई थी। बहन ज्योति इन्सां ने बताया कि राम शंकर इन्सां ने शरीर छोड़ने के लगभग 15 दिन पहले ही बता दिया था कि उनके शरीर को उनकी मृत्यु के बाद मेडिकल अनुसंधान के लिए दान कर दिया जाए। उन्होंने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की प्रेरणा से जीते जी मरणोपरांत देहदान का फार्म भरा हुआ था।
बहन ज्योति इन्सां ने बताया कि राम शंकर को रूटीन चेकअप के लिए डॉक्टर के पास लेकर गये थे। डॉक्टर ने भी उनको चेक करके कहा कि ये बिल्कुल ठीक है। जैसे ही दोनों भाई घर ले लिए आ रहे थे तो रास्ते में उन्होंने कहा कि सतगुरु जी का बुलावा आ गया है और अब जाना पड़ेगा, कहकर देह त्याग दी। राम शंकर इन्सां की देह को एम्बुलेंस के जरिए रामा रिसर्च मेडिकल कॉलेज, हापुड़, उत्तर प्रदेश भेजा गया है।
मेडिकल रिसर्च में काम आएगी रामशंकर इन्सां की देह | Ambala News
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार, यह पार्थिव शरीर अब डॉक्टरों की नई पीढ़ी को मानव शरीर की संरचना को समझने और उस पर शोध करने में मदद करेगा। धार्मिक आस्था से शुरू हुआ एक सफर इस तरह विज्ञान की प्रयोगशाला में जाकर अमर हो गया। परिजनों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, जब विदाई की घड़ी आई तो उनकी पत्नी ललिता और बेटों बृजमोहन, नरेश व आशीष ने आंसुओं को रोककर पिता की अंतिम इच्छा को सर्वोपरि रखा। महिलाओं ज्योति, अंकिता इन्सां, कशिश इन्सां ने अर्थी को कंधा दिया और समाज को बराबरी का संदेश दिया।















