हिसार (सच कहूँ/मुकेश)। कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए यह समय बेहद निर्णायक साबित हो सकता है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कपास विशेषज्ञ डॉ. करमल सिंह मलिक ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसान बुवाई में देरी करते हैं, तो उन्हें उत्पादन में गिरावट और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि देसी कपास की बुवाई केवल अप्रैल माह तक ही करनी चाहिए, विशेषकर रेतीली मिट्टी वाले क्षेत्रों में। इसके बाद तापमान बढ़ने से पौधों के झुलसने और कमजोर बढ़वार की समस्या बढ़ जाती है। वहीं अमेरिकन कपास की बुवाई अप्रैल से मई के अंत तक की जा सकती है, लेकिन समय पर बुवाई ही बेहतर उत्पादन की कुंजी है।
बीज की मात्रा
बीज मात्रा को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि देसी कपास के लिए 1 से 1.5 किलो रुई उतरा हुआ बीज प्रति एकड़ पर्याप्त है, जबकि बिना रुई उतरे बीज के लिए 3 से 4 किलो मात्रा रखनी चाहिए। अमेरिकन कपास के लिए प्रति एकड़ दो पैकेट (450-450 ग्राम) बीज उपयुक्त हैं, जबकि मशीन से बुवाई करने वाले किसानों को ढाई पैकेट बीज का प्रयोग करना चाहिए।
इन्तेर्क्रोपिंग भी बढ़िया विकल्प खाद प्रबंधन देगा ज्यादा फायदा
उन्होंने संतुलित खाद प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि प्रति एकड़ एक कट्ठा डीएपी, एक कट्टा यूरिया और 15 से 20 किलो पोटाश का उपयोग फसल को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है और उत्पादन बढ़ाता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाएं और समय पर बुवाई करें। उन्होंने कहा कि कपास की खेती में सही समय, सही बीज और सही तकनीक ही सफलता की असली कुंजी है।















