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    गरीबी की बदहाली पर मौन सरकार

    Silence, Government, Poverty, Reduction

    1.26 अरब जनसंख्या की 25 फिसदी से ज्यादा अभी भी गरीबी रेखा से नीचे रहते है

    भारत एक तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के बावजूद भी भारत की अधिकतम जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है। विश्व की लगभग 20 फीसदी जनसंख्या भारत में निवास करती है। गरीबी चारों तरफ फैली हुई एक व्यापक स्थिति है। जो आजादी के बाद से एक बड़ी चिंता हमेशा बनी हुई है। स्वन्त्रता प्राप्ति के बाद आज भी गरीबी देश में एक लगातार बढ़ता हुआ खतरा है। ये 21वीं शताब्दी है और गरीबी आज भी लगातार बढ़ रही है। 1.26 अरब जनसंख्या की 25 फिसदी से ज्यादा अभी भी गरीबी रेखा से नीचे रहते है। यह देश के लिए खतरा नही है तो क्या है। और साथ ही साथ भारत की प्रगति में बाधक है हालांकि यह ध्यान देने योग्य है कि पिछले दशक में गरीबी के स्तर में काफी गिरावट आई है ।

    भारत खपत और आय दोनों के आधार पर गरीबी के स्तर को मापता है।

    एक देश का स्वास्थ्य भी उन लोगों के मानकों पर निर्धारित होता है जो राष्ट्रीय आय और घरेलू उत्पाद के अलावा उस देश के लोगों के स्तिथि पर आधारित होता हैं। इस प्रकार गरीबी किसी भी देश के विकास में एक बड़ा धब्बा बन जाती है। गरीबी को एक ऐसी स्थिति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिसमें एक व्यक्ति जीवन यापन के लिए बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ होता है। इन बुनियादी जरूरतों में शामिल हैं, भोजन, कपड़े और मकान। गरीबी वो स्थिति है जो लोगों को जीने के लिये आवश्यक मानकों का वहन नहीं करती। गरीबी वो दुश्चक्र है जो आमतौर पर परिवार के सभी सदस्यों को शामिल करती है। अत्यधिक गरीबी के कारण अंतत: व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। भारत में गरीबी अर्थव्यवस्था, अर्द्ध-अर्थव्यवस्था और परिभाषाओं के सभी आयामों को ध्यान में रखते हुए परिभाषित की गई है जो अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के अनुसार तैयार की जाती हैं। भारत खपत और आय दोनों के आधार पर गरीबी के स्तर को मापता है।

    • सरकार के साथ साथ हम सभी को भी इस मुहिम में भाग लेने की आवश्यकता है जिससे की गरीबी से निजात पाया जा सके।
    • सरकार के द्वारा गरीबी उन्मूलन के लिए बिभिन्न प्रकार की सरकारी योजनाए बनाई गयी है।
    • जैसे पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली), मनरेगा और राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना इत्यादि।
    • महात्मा गांधी ने कहा था की “गरीबी दैवीय अभिशाप नही मानवीय सृष्टि है” अर्थात अगर हम सच मुच ठान ले तो गरीबी से छुटकारा पाया जा सकता है।
    • हमारे देश के सभी लोगो को अमीरों और गरीबों के बीच की रेखा को पूरी तरह से मिटाने के प्रयासों का कड़ाई से अनुसरण करने की आवश्यकता है
    • प्रयासों को जबरदस्त ढंग से पालन करने की आवश्यकता है। जिससे की गरीबी ज्यादा से ज्यादा कम हो सके।

    रिपोर्ट के मुताबिक 10 में से हर तीसरा व्यक्ति गरीब है

    भारत गरीबी के स्तर पर उपभोग और आय दोनों के आधार पर निर्णय लेता है। उपभोग का मापन मुद्रा के उस भाग से किया जाता है जो लोगों द्वारा घर की आवश्यक चीजों को खरीदने पर व्यय किया जाता है और आय की गणना विशेष व्यक्तियों द्वारा कमायी जाने वाली आय के अनुसार होती है। एक अन्य अवधारणा है जिसका यहां उल्लेख करना आवश्यक है वो है गरीबी रेखा की अवधारणा। ये गरीबी रेखा भारत के साथ ही अन्य राष्ट्रों में गरीबी मापने के मानक के रुप में कार्य करती है। गरीबी रेखा आय के न्यूनतम स्तर को बताती है। जो एक परिवार के जीवन यापन के लिये आवश्यक आधारभूत जरुरतों को पूरा करने के लिये जरुरी होती है। सी रंगराजन समिति 2014 के अनुसार भारत में गरीबी रेखा के नीचे उन लोगों को रखा गया है जिनकी आय ग्रामीण क्षेत्रों में 32 रुपये प्रतिदिन तथा कस्बों और शहरों में 47 रुपये प्रतिदिन है। रिपोर्ट के मुताबिक 10 में से हर तीसरा व्यक्ति गरीब है यनि देश के करीब 30 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे तथा 70 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से ऊपर है। खपत उस धन कारण मापा जाता है जो आवश्यक वस्तुओं पर घर से खर्च होता है और आय एक विशेष परिवार द्वारा अर्जित आय के हिसाब से गिना जाता है।

    भारत यादव बीएचयू

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