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Saturday, February 7, 2026
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    यहां रैगिंग से नहीं, तिलक व लड्डू खिलाकर होता नए छात्रों का स्वागत

    Shah Satnam Ji Girl's School

    शाह सतनाम जी गर्ल्ज स्कूल की अनोखी है रीत

    • प्राचार्या डॉ. शीला पूनिया ने स्वयं किया नए बच्चों का स्वागत
    • स्वागत समारोह के दौरान रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम ने किया सबको मंत्रमुग्ध

    सरसा (सच कहूँ न्यूज)। शाह सतनाम जी गर्ल्ज स्कूल सरसा में आए नए बच्चों के लिए स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वयं प्राचार्या डॉ. शीला पूनिया ने बच्चों को तिलक लगाकर व लड्डू खिलाकर उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति भी दी गई। जिसमें बच्चों ने विभिन्न लोकगीतों पर नृत्य पेश कर समां बांधा। इससे पूर्व प्राचार्या डॉ. शीला पूनिया ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। जिसके बाद स्कूल में आए नए बच्चों के लिए स्वागत गीत गाया गया। बतां दे कि पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं पर अमल करते हुए स्कूल में हर साल नए बच्चों का स्वागत इसी तरह किया जाता है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में आपसी प्रेम व भाईचारा बढ़ाना व रैगिंग जैसे अपराध को समाप्त करना है।

    हरियाणवीं व पंजाबी नृत्यों पर थिरकी छात्राएं

    शाह सतनाम जी गर्ल्ज स्कूल के स्वागत समारोह में भूमिशा, सानिया, अवनी, टीना व छठी की करिश्मा व अनमोल ने हरियाणवीं नृत्य पेश कर खूब तालिया बटौरी। जबकि आठवीं से दसवीं की छात्राओं कमलप्रिय, दिव्या, तृत्ती, प्रियाशीं व आस्था, मिताली, अर्पिता, अर्श, सिमरन, नंदीनी तथा विनय, रेनू, तमन्ना, कोमल ने पंजाबी भंगड़ा प्रस्तुत कर सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया वहीं भारतीय सांस्कृति को भी जीवित करने का काम किया। अंत में प्राचार्या ने

    यहां शिक्षा के साथ बच्चों को पढ़ाया जाता है परोपकार का पाठ: डॉ. पूनिया

    स्वागत समारोह के अंत में प्राचार्या डॉ. शीला पूनिया ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अकसर देखा गया है कि जब भी कोई छात्र स्कूल में दाखिला लेता है तो उसके साथ रैगिंग होती है। ये एक दंडनीय अपराध भी है, लेकिन पूज्य गुरु जी की दी गई पावन शिक्षाओं की बदौलत शाह सतनाम जी गर्ल्स स्कूल में नए छात्रों के साथ रैगिंग नहीं बल्कि प्रेम व भाईचारा पाया जाता है। यहां बच्चों को शिक्षा तो दी ही जाती है साथ ही इंसानियत व जरूरतमंद की मद्द कर परहित परोपकार करना भी सिखाया जाता है।

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