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    विस चुनावों में अपना भविष्य ढूंढ़ने में जुटी राजनैतिक पार्टियां

    Political parties seeking their future in the elections

    लोकसभा चुनावों के बाद से हरियाणा की राजनीति में भूचाल

    सच कहूँ, देवीलाल बारना कुरुक्षेत्र । लोकसभा चुनाव में भाजपा के सराहनीय प्रदर्शन के बाद अन्य पार्टियां विधानसभा चुनावों के लिए भविष्य ढूंढ़ने में जुट गई हैं। लोकसभा चुनाव मे भाजपा द्वारा 10 की 10 सीटों पर कब्जा करने के बाद जहां भाजपाई पूरी तरह से उत्साहित दिख रहे हैं, वहीं अन्य दल इसे इवीएम में गड़बड़ी व सोशल मीडिया मोदी की आंधी करार दे रहा है। लेकिन जो भी हो हरियाणा में एक दल द्वारा पहली बार इस प्रकार का प्रदर्शन रहा है। इस चुनाव में जहां अनेक दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी वहीं हुड्डा का राजनैतिक किला भी ढ़हने से न रह सका।

    हालांकि इस बार कांग्रेस के वोट प्रतिशत में 5.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, लेकिन सीट कोई भी न आ सकी। 1999 के बाद कांग्रेस की हरियाणा में सबसे बडी हार हुई है। 1999 में भी एनडीए की आंधी में कांग्रेस दस की दस सीटें हार गई थी। उसके बाद 2004 व 2009 में कांग्रेस ने 10 में से 9 सीटों पर कब्जा किया था। 2014 में कांग्रेस में स्थित डावांडोल हुई और मात्र एक सीट पर अटक गए। लेकिन इस बार कांग्रेस रोहतक सहित 10 की 10 सीटें हार गई। ऐसे में जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं तो कांग्रेस सहित अन्य दल असमंजस में है कि हरियाणा में किस प्रकार अपनी स्थिति में सुधार किया जाए।

    • कांग्रेस व इनेलो के लिए मुश्किल पैदा कर गया जींद उपचुनाव

    जींद उपचुनाव के बाद से प्रदेश में कांग्रेस व इनेलो पर संकट छा गया है। बता दें कि जींद सीट पर पहले इनेलो का कब्जा रहा है। इनेलो के विधायक हरिचंद मिढ़ा की मृत्यु के बाद उपचुनाव हुए। चुनाव से ठीक पहले हरिचंद मिढ़ा के पुत्र डॉ. कृष्ण चंद मिढ़ा भाजपा में शामिल हो गए व भाजपा ने कृष्ण चंद मिढ़ा को चुनावी मैदान में उतार दिया। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हुए इस चुनाव में सभी पार्टियों ने खूब जोर लगाया।

    कांग्रेस की ओर से राष्टÑीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला को चुनावी मैदान में उतारा लेकिन रणदीप सुरजेवाला बड़ी मुश्किल से ही अपनी जमानत बचाने में सफल हुए। इनेलो-बसपा गठबंधन इस चुनाव में मात्र लगभग साढेÞ तीन हजार वोटों पर सीमट गया। वहीं इनेलो से अलग हुई जननायक जनता दल ने दिग्विजय चौटाला को चुनावी मैदान में उतारा। चुनाव में दिग्विजय सिंह चौटाला दूसरे स्थान पर रहे। इस चुनाव में भाजपा ने भी पूरा जोर लगाया जिसका नतीजा यह हुआ कि भाजपा के डॉ. कृष्ण चंद मिढ़ा दिग्विजय चौटाला को 12900 वोटों से हराकर जीत गए।

    • एक नहीं सारे ही कांटे निकल गए

    जींद चुनाव में ही शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर रणदीप सुरजेवाला को चुनाव में उतारने पर चुटकी लेते हुए कहा था कि आपने तो रास्ते का कांटा निकाल ही दिया। रामबिलास शर्मा व भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच हुई यह विडियो सोशल मीडिया पर खूब प्रचलित हुई। लेकिन लोकसभा में चुनाव में कांग्रेस के सभी कांटे निकले हुए नजर आए।

    • अब सीएम का दावेदार कौन?

    कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में सभी दिग्गजों को चुनावी मैदान में उतारा था। कयास लगाए जा रहे थे कि जो सबसे अधिक वोटों से जीत दर्ज करेगा, वहीं हरियाणा में सीएम पद का उम्मीदवार होगा, लेकिन स्थिति इसके बिल्कुल ही उल्ट हो गई। चुनावी मैदान में उतरे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा, श्रुति चौधरी, दीपेंद्र हुड्डा, कैप्टन अजय यादव, सहित सभी उम्मीदवारों ने हार का मुंह देखना पडा। चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के राष्टÑीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने डिस्क प्रोब्लम के कारण चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। ऐसे में अब देखना होगा कि कांग्रेस की ओर से सीएम का दावेदार कौन होगा।

    • पिता-पुत्र को छोड़कर जीत का अंतर तीन लाख के पार

    लोकसभा चुुनाव में पिता-पुत्र भूपेंद्र सिंह हुड्डा व दीपेंद्र सिंह हुड्डा की हार का अंतर सबसे कम रहा। दीपेंद्र हुड्डा का सबसे सबसे कम 7503 वोटों का अंतर रहा। वहीं भूपेंद्र हुड्डा लगभग पौने दो लोख वोटों से अपने प्रतिद्वंद्वी से हारे। इनके अलावा कांग्रेस के सभी प्रत्याशी तीन लाख से ज्यादा मतों के फैसले से हारे।

    • पार्टी बदलने की फिराक में कई नेता

    लोकसभा चुनावोंं के बाद कई नेता अब अपना राजनैतिक घर भी बदलने की फिराक में नजर आ रहे हैं। विधानसभा चुनाव भी नजदीक आ गए हैं, ऐसे में कई राजनेताओं का पार्टी बदलने का दौर शुरु हो जाएगा। अब देखना होगा कि कौनसा नेता किस पार्टी में अपना भविष्य उज्जवल समझेगा?

     

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