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    प्रदूषण बना साइलेंट किल्लर, अब तो जागिये सरकार

    Jaipur News
    राज्य सरकार प्रदूषण मुक्त राजस्थान के लिए कृतसंकल्पित

    दुनिया में भारत ऐसा एक देश बन गया है जहां वायु प्रदूषण के कारण सबसे अधिक मौत हो रही हैं। हैरानी वाली बात तो यह है कि देश की बड़ी पार्टियों हो या छोटे क्षेत्रीय दल दोने ही वायु प्रदूषण मुद्दे पर किसी ने कोई बात नहीं की, किसी भी राजनीतिक पार्टी ने चुनावी रैलियों में वायु प्रदूषण मुद्दे को प्रमुखता से नहीं रखा, न ही प्रदूषण का मुद्दा नहीं उठाया। पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण हेतु पूरे विश्व में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का लक्ष्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण और उसकी सुरक्षा के प्रति जागरुक करना होता है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक जागृति लाने हेतु वर्ष 1972 में इस दिन को मनाने की घोषणा की थी पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर सन 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्टॉकहोम (स्वीडन) में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया इसमें 119 देशों ने भाग लिया। पहली बार 5 जून 1974 को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया।

    पर्यावरण शब्द संस्कृत भाषा के दो शब्दों परि+आवरण से मिलकर बना है इसमें परि का अर्थ होता है चारों तरफ से एवं आवरण का अर्थ है ढके हुए। आज सम्पूर्ण विश्व पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से चिन्तित है । पर्यावरण प्रदूषण आज मानव जाति के समक्ष एक गंभीर समस्या है, जिसका जल्द समाधान करना आवश्यक है। पर्यावरण और जीवन दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।

    पर्यावरण में फैलता प्रदूषण विश्व की सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है। पर्यावरण प्रदूषण ने विश्व में आज लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति हर आमजन को अपनी नैतिक जिम्मेवारी को निभाना होगा। वर्ल्ड हेल्थ आगेर्नाइजेशन के मुताबिक, हर साल वायु प्रदूषण की वजह से दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत होती है । अमेरिका की यूनिवर्सिटी आॅफ शिकागो ने दिल्ली में लगातार खराब हो रही हवा पर अपने अध्ययन में अध्ययनकतार्ओं ने पाया कि दिल्ली में प्रदूषण से हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं, दिल्ली का प्रदूषण लोगों के लिए बेहद जानलेवा साबित हो रहा है। यूनिवर्सिटी आफ शिकागो में इकनॉमिक्स में मिल्टन फ्राइडमैन के प्रोफेसर मिशेल ग्रीनस्टोन ने एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर ये स्टडी की है। इस स्टडी में उनकी टीम ने दिल्ली में खराब हुई हवा का जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया। स्टडी में प्रदूषित हवा में सांस लेने से होने वाले खतरों को की जांच की गई है, जिसमें सामने आया कि प्रदूषण के कारण लोगों के जीवन से 10 साल कम हो रहे हैं ।

    यह बेहद चिंताजनक है कि हमारे देश में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कोई दीर्घकालिक एवं समग्र नीतियों का अभाव ही दिखाई दे रहा है। वायु प्रदूषण को लेकर चौंकाने वाली बात सामने आई है। अमेरिका के हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वायु प्रदूषण स्वास्थ्य संबंधी सभी खतरों से होने वाली मौतों में तीसरा सबसे बड़ा कारण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरी दुनिया में वायु प्रदूषण से जितने लोगों की मौत होती है, उसकी आधी संख्या भारत और चीन में है। भारत और चीन में 2017 में वायु प्रदूषण से क्रमश: 12-12 लाख लोगों की मौत हुई । डब्ल्यूएचओ की इस सूची में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली छठे स्थान पर है।

    भारत में जहरीली होती हवा को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट वायु प्रदूषण और बाल स्वास्थ्य नामक रिपोर्ट में बताया गया है कि में पता चला है कि साल 2016 में भारत में पांच साल से कम उम्र के करीब एक लाख बच्चों की जहरीली हवा के प्रभाव में आने से मौत हुई है, मरने वाले बच्चों में लड़कियों की संख्या लड़कों से ज्यादा है। दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के 94 शहरों के लोग जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं।

    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी आंकड़े से पता चलता है कि यहां की हवा जहरीली हो चुकी है, यह लोगों की सेहत के लिए नुकसानदेह है। पिछले साल मई के महीने में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कानपुर को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बताया था। यह हवा में पीएम 2.5 की मात्रा पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के आधार पर कहा गया था। एक अंतरराष्ट्रीय शोध रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई है कि अगर प्रदूषण स्तर को काबू में नहीं किया गया तो 2025 तक दिल्ली में हर साल करीब 32,000 लोग जहरीली हवा के शिकार होकर असामयिक मौत के मुंह में समा जाएंगे।

    -युद्धवीर सिंह लांबा
    अकिडो कॉलेज आफ इंजीनियरिंग,
    झज्जर (हरियाणा)

     

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