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Tuesday, February 3, 2026
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    रेलवे की ‘समाजसेवा’ पर विचार करने का समय आ गया है

    Piyush Goyal

    रेलमंत्री पीयूष गोयल ने प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा (Piyush Goyal)

    नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि रेलवे के व्यय में सिर्फ वाणिज्यिक लागत ही नहीं ‘सामाजिक लागत’ भी है और इस पर विचार करने का समय आ गया है कि हम इसे कब तक जारी रख सकते हैं। गोयल ने बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘समय आ गया है कि हम सामाजिक लागत पर अलग से विचार करें और हमारा परिचालन अनुपात (लागत और उससे प्राप्त राजस्व का अनुपात) शुद्ध रूप से वाणिज्यिक पहलुओं को दशार्ये। हमें यह भी देखना होगा कि हम कब तक सामाजिक कारणों पर खर्च करना जारी रख सकते हैं।

    रेलवे सिर्फ वाणिज्यिक ही नहीं सामाजिक सेवाएं भी देती है

    कांग्रेस के गौरव गोगोई द्वारा नियंत्रण एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए रेलवे के गिरते परिचालन अनुपात के बारे में पूछे जाने पर गोयल ने कहा कि रेलवे सिर्फ वाणिज्यिक ही नहीं सामाजिक सेवाएं भी देती है। दूरदराज के इलाकों, पर्वतीय इलाकों तथा अन्य दुर्गम इलाकों में परिचालन से कभी मुनाफा नहीं होता लेकिन इसका सामाजिक पहलू है। इन सेवाओं की अपनी सामाजिक लागत है। उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने से रेलवे पर सालाना 22,000 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ा है जो उसके कुल राजस्व के 10 प्रतिशत से ज्यादा है। इसलिए परिचालन अनुपात में गिरावट आयी है। इससे पहले छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बाद भी परिचालन अनुपात 15 प्रतिशत बढ़ गया था।

    राजनीतिक दल का नाम लेने पर नायडु नाराज

    • राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडु ने बुधवार को शून्यकाल के दौरान एक सदस्य द्वारा
    • एक राजनीतिक दल का नाम लेने पर नाराजगी व्यक्त की
    • कहा कि सदन में पुख्ता प्रमाण के बिना किसी पर आरोप नहीं लगाया जाना चाहिए।
    • भारतीय जनता पार्टी के जी वी एल नरसिम्हा राव के भीमा कोरेगांव मामले को उठाते हुए
    • एक राजनीतिक दल का नाम लिया जिसका वामपंथी दलों के सदस्यों ने कडा विरोध किया
    • उसके सदस्य एक साथ खड़े होकर जोर जोर से बोलने लगे ।
    • इससे सदन में शोरगुल बढ़ गया।
    • नायडु ने कहा कि किसी निर्वाचित सरकार के खिलाफ आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए ।
    • कुछ सदस्य अचानक खड़े हो जाते हैं । यह गंभीर मामला है ।
    • उन्होंने सदस्यों को चेतावनी दी और कहा कि उनकी बात नहीं मानेंगे तो उन्हें पुरक प्रश्न करने से बंचित कर दिया जाएगा।

     

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