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Friday, March 20, 2026
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    संत शेख फरीद

    Sheiksh-Farid
    Sheiksh-Farid

    महापुरुष सूखे नारियल की तरह होते हैं

    शेख फरीद एक गाँव में पहुँचे थे। उनसे कई लोग मिलने आए। एक व्यक्ति ऐसा भी था जिसके पास कई प्रश्न थे। उसने फरीद को प्रणाम किया और प्रश्न पूछा- ‘ऐसा क्यों होता है कि ईसा मसीह को लोग सूली पर चढ़ाते हैं और वे सूली पर चढ़ाने वालों के लिए ही मंगलकामना करते हैं। तब भी वे हंस ही रहे थे?’ फरीद मुस्कुराए और उसे एक गीला नारियल हाथ में दिया। प्रश्नकर्त्ता को समझ नहीं आया कि फरीद ऐसा क्यों कर रहे हैं। जब फरीद ने प्रश्नकर्त्ता से कहा, अब इसे फोड़ो लेकिन इस बात का ख्याल रखना कि नारियल का गिरि वाला हिस्सा बिल्कुल अलग और पूरा खोल ही बाहर निकले। प्रश्नकर्त्ता व्यक्ति ने ऐसा ही किया, लेकिन जब खोपरा बाहर निकला तो टुकड़ों में था और नारियल की खोल भी चिपकी हुई थी। तब फरीद ने उसे एक सूखा नारियल दिया और इसे फोड़ने को कहा। उसे व्यक्ति ने जब सूखा नारियल फोड़ा तो देखा गिरि वाला गोला पूरा साबूत अलग निकला और नारियल की खोल पूरी की पूरी अलग हो गई थी। तब फरीद ने सवाल पूछने वाले को कहा, बस यही तुम्हारे सवाल का जवाब है। महापुरुष सूखे नारियल (Coconut) की तरह होते हैं और आम आदमी गीले नारियल जैसा। जब तक वह भौतिक वस्तुओं के आकर्षण और रिश्ते-नातों के मोह में बँधा है, कष्ट की नौबत आने पर दुखी होता है, जबकि संत-महात्मा सूखे नारियल की भाँति मोह से परे होते हैं, जैसे खोल से सूखा नारियल। भौतिक वस्तुओं के प्रति आकर्षण हो या संबंधों का मोह, हम जब तक जुड़े हैं कष्ट है। कोशिश करें यह जुड़ाव ऊपरी हो, भीतरी नहीं।

    युधिष्ठिर का ध्यान

    वन में बैठे युधिष्ठिर ध्यान मग्न थे। ध्यान से उठे तो द्रौपदी ने कहा, ‘‘महाराज! आप भगवान का इतना भजन करते हैं, इतनी देर तक ध्यान में बैठे रहते हैं, फिर उनसे क्यों नहीं कहते कि आपके संकटों को दूर कर दें? इतने वर्षों से आप और दूसरे पांडव वन में भटक रहे हैं। इतना कष्ट होता है, इतना क्लेश। फिर आप भगवान से क्यों नहीं कहते कि इन कष्टों का अंत कर दें।’’ युधिष्ठिर बोले, ‘‘द्रोपदी मैं भगवान का भजन तो करता हूँ, लेकिन सौदे के लिए नहीं। मैं भजन करता हूँ केवल इसलिए कि भजन करने में आनंद मिलता है। सामने फैली हुई उस पर्वतमाला को देखो। उसे देखते ही मन प्रफुल्लित हो जाता है। हम उससे कुछ माँगते नहीं। हम देखते हैं इसलिए कि उसे देखने से प्रसन्नता होती है। बस इसी तरह अपनी प्रसन्नता के लिए मैं भगवान का भजन करता हूँ।’’

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